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पंजाब-हरियाणा

राजनीतिक हालात बदल सकता है, हरसिमरन बादल का ताऊ देवीलाल जैसा फैसला

यह पुरानी और आम मान्यता है कि हरियाणा प्रदेश की जनता और किसान प्रदेशों में और देश में राजनीतिक राय बनाने का काम करते हैं lमतलब जनमत बनाने में इन दोनों का बहुत योगदान रहता है l हरियाणा देश की राष्ट्रीय राजधानी और राष्ट्रीय राजनीति दोनों को प्रभावित करता हैl देश का किसान संघर्ष करता है आंदोलन करता है राजनीतिक जनमत तैयार करता है लेकिन यह भी सच है कि उसे फिर भी कुछ नहीं मिलता परंतु देश के हालात दशा और दिशा बदलने का काम कर जाता है lआज जब देश की जीडीपी गिरकर माइनस में चली गई है वही किसान ने वैश्विक विषम परिस्थितियों के चलते इसे 3% से भी ऊपर बनाए रखने का काम किया है। आज जो परिस्थिति बन रही हैं उसमें साफ नजर आता है कि देश में एक बड़े किसान नेता की जरूरत है l वह इसलिए कि पिछले दो दशकों में किसान और मजदूर मैं पुराना तालमेल समाप्त हो गया है lकिसान धर्म और जाति में बट गया हैl देश के दो चोटी के किसान नेता दीनबंधु सर छोटू राम और चौधरी चरण सिंह एक बात कहा करते थे  कि किसान किसान पहले है हिंदू मुस्लिम बड़ा छोटा बाद में l

अब हम मुद्दे की बात करते हैं l हाल में किसानों को लेकर तो बड़ी घटनाएं हुई है l एक हरियाणा में ,एक पंजाब मे l हरियाणा के किसान ने सबसे पहले केंद्र सरकार के 3 अध्यादेशो का विरोध करने की हिम्मत जुटाई l
80 साल की उम्र के बुजुर्गों ने लाठियां खाई परंतु केंद्र सरकार को एक्सपोज करने की कोशिश की l
उधर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की पुत्रवधू हरसिमरत बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर दो बातें साफ कर दी l एक यह कि राजनीति आर पार का नाम होता है, आप हां कहिए या ना कहिए l दो नावों में पैर न रखें और मौके पर फैसला लेने में देर मत करें तो किसका शत प्रतिशत आउटपुट निकलकर आएगा l दूसरा यह कि बादल परिवार के इस फैसले ने पूरे देश के किसानों को प्रभावित करने का काम किया है l ऐसा करने का समय होता है राजनीतिक इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को पता है कि जब 1977 के दौर में तत्कालीन गृहमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर अपने जन्मदिन पर दिल्ली के वोट क्लब पर ऐतिहासिक किसान रैली का आयोजन किया उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल हुआ करते थे जब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी देसाई ने उन्हें इस रैली में चौधरी चरण सिंह का साथ में देने की बात कही तो चौधरी देवी लाल ने कहा था कि वह किसान पहले हैं और मुख्यमंत्री बाद में इस जवाब में चौधरी देवीलाल को पूरे देश में किसान नेता के रूप में स्थापित कर दिया था यह अलग बात है कि इसके बदले उन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा l

चौधरी देवी लाल के उस फैसले ने यह भी सिद्ध कर दिया था कि राजनीति में रिस्क लेना भी बहुत जरूरी होता है जो जितना बड़ा रिस्क लेता है उसे इतना ही लाभ और हानि होता है l हरसिमरन बादल के कहो या बादल परिवार के समय पर दिए गए त्यागपत्र ने संसद में कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी सरकार पर दबिश बनाने का मौका दे दिया है lयदि सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो आप देखेंगे कि इस मामले मे सरकार को पुनर्विचार करना पड़ सकता है जो किसानों की और विपक्ष के नेताओं की जीत मानी जाएगी l
हरियाणा के हालातों पर गौर करें तो यह प्रदेश सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है l वह इसलिए कि जहां हरियाणा में कुरुक्षेत्र जिले में इस आंदोलन की शुरुआत हुई वहीं क्षेत्र हरियाणा का ही नहीं देश का प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र है जिसे राइसबाउल के नाम से जाना जाता हैl जल्दी ही धान की फसल मंडियों में आने वाली है l किसान संघर्ष के लिए चार्ज हो चुका है और उसमें कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति भी मजबूत होती जा रही है l

उनकी अपेक्षाओं को समझता है lजिनमें उनका अपना न्यूनाधिक हस्तक्षेप भी रहता है lनाम लेने की जरूरत नहीं , बहुत लोग खुद ही समझ जाएंगे l
मंडी बचाओ किसान बचाओ रैली कब हुई कहां हुई किसे आगे कर की गई ,यह समझते ही सारे रहस्य खुल जाते हैं l
आने वाले टाइम में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि हरियाणा और पंजाब और इसके किसान उनके लिए ऐसी परेशानी पेश कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चमक भी पड़ने लग जाएगी और हरियाणा की बात करें तो निकट भविष्य में बरोदा जिला सोनीपत में होने जा रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और हरियाणा सरकार बैकफुट पर नजर आने लगेगी l

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