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ब्रेकिंग न्यूज़ : वाराणसी में आज मेगा रोड शो - मोदी

वाराणसी 
दश्वाश्वमेध घाट पर गंगा पार कराने की जिम्मेदारी रामलोटन निषाद के कंधे पर है। गंगा की लहरों में चढ़ती-उतराती नाव की तरह उनकी आंखों में भी चिंता चढ़-उतरा रही है। कहते हैं ‘मोदी गंगा मा जहाज चलवइहन, त हमने का करब..’। कुछ देर के सन्नाटे के बाद फिर बोलते हैं ‘लेकिन हौ सब मोदिअ-मोदी! केहू लड़े वाला हईअ नाहीं हौ!’जब मोदी से बनारस में कोई लड़ने वाला नहीं है तो मोदी आखिर दो दिन यानी गुरुवार और शुक्रवार को यहां की सड़कों पर पसीना क्यों बहाएंगे? जवाब नदेसर की बतकही से आता है। पान के पत्ते पर चूना लगा रहे राम सिंह कहते हैं ‘मोदी बनारस खातिर थोड़ो आवत हवं, नजर त पूरे पूर्वांचल पर बा!’ 

बनारस की यह बतरस महज जुबानी चर्चा नहीं बल्कि कसौटी पर खरी उतरी हुई रणनीति है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बनारस में ‘रस’ लेने वाले पूर्वांचल में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था। बनारस, इलाहाबाद, आजमगढ़, मीरजापुर, गोरखपुर मंडल के तार कहीं सीमा से तो कहीं रवायत से बनारस से जुड़ते हैं। देवीपाटन मंडल तकनीकी तौर पर अवध का हिस्सा है लेकिन, यहां की हवा वहां तक भी पहुंचती है। इसके साथ ही यूपी से सटे बिहार की छह सीटें भी माटी-बोली और आवाजाही का नाता बनारस से जोड़ती हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इस परिधि में आने वाली 32 सीटों में 31 बीजेपी ने जीती थी और आजमगढ़ में मुलायम को नाकों चने चबवा दिए थे। 

विधानसभा में भी काम आया था नुस्खा 
2017 के विधानसभा चुनाव में भी मोदी बनारस में जमे तो बीजेपी का सिक्का पूर्वांचल में जम गया। उस दौरान खुद मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में ही बीजेपी उथल-पुथल व विरोध से गुजर रही थी। स्थानीय स्तर पर घोषित प्रत्याशियों का विरोध था। दिग्गज नेता श्यामदेव राय चौधरी का टिकट कटने का आक्रोश चरम पर था। पूर्वांचल आम तौर पर एसपी, बीएसपी को सुहाता रहा है। इसलिए आशंका के बादल पड़ोसी जिलों की सीटों पर भी मंडरा रहे थे। इस बीच मोदी ने बनारस में तीन दिन डेरा डाला। 

बनारस की हर सड़क नापीं। आलम यह रहा कि पहली बार बनारस में बीजेपी ने सभी आठों सीटें जीतीं। आखिरी चरण की 40 सीटों में 80% से अधिक पर बीजेपी काबिज हुई। इसलिए मोदी मय बनारस पूर्वांचल मय बीजेपी के लिए अब तक का सबसे कारगर नुस्खा साबित होता रहा है। 

चुनौती बड़ी तो शो भी बड़ा 
बनारसियों का मानना है कि विपक्ष ने अब तक जो चेहरा चुना है वह 2014 के मुकाबले मोदी की जमीन को आसान बना रहा है। हालांकि, अभी कांग्रेस की उम्मीदवारी का इंतजार है। पिछले बार मोदी से अरविंद केजरीवाल मुकाबिल थे। कांग्रेस ने स्थानीय विधायक अजय राय को उतारा था। एसपी से पूर्व मंत्री कैलाश चौरसिया लड़े थे। 

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