• 05:53 pm
news-details
पंजाब-हरियाणा

ताली थाली के बाद दिवाली

    दिमाग की बत्ती आखिर कब जलेगी? सुरक्षा की बत्ती कब जलेगी? जिम्मेदारी की बत्ती कब जलेगी, यह जो बत्तियां बुझा कर दिया हाथ में थमा दिया है, यह दिया कोरोना पर रोना ही है यह उजियारा इससे ज्यादा कुछ नहीं। याद है पूरे हिंदुस्तान को प्रभु राम जी के आने पर हमने दीप जलाये थे, अब कोरोना जी के आगमन पर दिया। हे राम! हमें माफ करना ये क्या कह दिया? हम उम्मीद कर रहे थे कि उम्मीद की राह निकलेगी, हमें आपसे उम्मीद का हक भी है, करेंगे भी हम आपसे उम्मीद, हमने इसीलिए आपको चुना है। सच बताओ सोच कर बोलना ये वक्त दिया, टॉर्च, मोमबत्ती लेकर छत पर खड़े होने का नहीं है, ये लॉकडाउन का समय है। एकांत का समय है ये खुद को घर में रखने का दूसरों को बचाने का समय है।
    अब मोमबत्ती की रोशनी नापेगी हमारी राष्ट्रभक्ति, पहले थाली और ताली की गूंज से राष्ट्रभक्त का चोला ओढ़ चुके हैं। देश के नाम पर करेंगे भक्ति की शक्ति दिखाएंगे ताली थाली के बाद दिवाली भी मनायेंगे पर इससे हासिल क्या होगा? 
    क्या आज यह देश के लिये सही है कि घरों से निकलकर मोमबत्तियां ढूंढती भीड़ दिखे, तेल की तलाश, कपास की आस दिखे, दिये की चाह और रोशनी का इंतज़ार दिखे बोलने से पहले सोचने की आदत डालो। 
    देश के कोने कोने में ये बेमौसम दिवाली बड़े धूम से मनाई जायेगी ये इतनी बड़ी और भव्य भी होगी की राम जी भी सोच मे पड़ जायेंगे की राम बड़े या कोरोना जी... क्योंकि अब राम लला को नहीं सरकार को आपको प्रसन्न करना है। मेरे देश के लोग ये मौका जाने नही देंगे आपकी हर बात में राष्ट्रभक्त बनने की सीढ़ी जो छुपी है और जो आपके साथ वो सच्चा हिंदुस्तानी नहीं तो भक्त साबित ही कर देंगे उसे पाकिस्तानी। करो तैयारी दोस्तों दिवाली मनाने का फरमान आया है। इस इवेंट की सफलता के बाद मौका दो साहब को एक और नए इवेंट को जन्म देने का।
    कोरोना फंक्शन से नहीं इन्वेंशन से मरेगा साहेब और इन्वेंशन दीया, मोमबत्ती, थाली, कटोरी, चमचा, चिमटा से नहीं होगा वो किसी लैब में हो रहे शोध से होगा। आज आवश्यकता है उन वैज्ञानिकों के तरफ ध्यान देने का, उन्हें सुविधा देने का, उन्हें सहायता करने का, उनका मनोबल बढ़ाने का, घंटा, घंटी, मोमबत्ती, टॉर्च जलाने बजाने से कोरोना डर जाएगा अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आपको आपकी सोच मुबारक हो। हम इस सोच के साथी नहीं हैं। ये समय दिए जलाने का नहीं सच मायने में दिमाग चलाने का है। राष्ट्र के नाम समर्पित सेवादारों को चिन्हित कर वरदान बनाने का है। उनसे साथ सहयोग लेने का है नौ मिनट पूरा देश सुन रहा था, नौ मिनट पूरा देश सोच रहा था, नौ मिनट देश को आपसे उम्मीद भी थी, नौ मिनट देशवासियों को यह लगा कि कोई उम्मीद का दिया आज जलेगा, कोई घोषणा होगी राहत की बात होगी। वह बोले, फिर बोले, क्या बोले... जलाओ दिए। समझ नहीं आता आप ऐसी बातें कहाँ से सोच कर लाते हो, समझ नहीं आता ऐसी बातों का क्या मतलब है, समझ नहीं आता। 
    आप देश के रहनुमा हैं, आप देश के नायक हैं, लोग आपसे थाली, ताली, दिवाली की उम्मीद नहीं करते आपसे राहत की उम्मीद करते हैं, पहरेदारी, हिफाजत की उम्मीद करते हैं और जब हिफाजत की, स्क्रीनिंग  की बारी थी कोरोना चेन को रोकने की बारी थी आपने कोई रोक नहीं लगाई, जब चीन में चित्कार था, चाइना कराह रहा था चीख पुकार रहा था तो एक दल को उखाड़ राजनीति के दलदल में कमल खिला शिवराज का राज तिलक आपके ही राज में हो रहा था। चाइना से कोई सबक नहीं लिया गया जबकि राहुल गांधी ने चेताया था, विपक्ष को नजरअंदाज किया गया। विपक्ष की चेतावनी को एक सिरे से खारिज किया चीन की चिल्लाहट को, चीन के चित्कार को, चीन की कराह को अपने मन में नहीं समा पाए काश सोच पाते तो आपके रोंगटे खड़े हो जाते और अब दिया जलवाकर ताली बजवाकर कोरोना वायरस को रोशनी दिखाकर क्या साबित करना चाहते हो। अरे साहेब कोरोना कोई बड़ा राक्षस थोड़ी ना है हजारों लोगों को देखकर वापस किसी मांद में या समुद्र में समा जाएगा। आप ही कहते हो कि एक साथ ना हो, ये दिवाली मेला सबको एक साथ लाएगा, अब जब उत्सव का नाम दे ही दिया है सब दिया भी ढूंढेंगे, मोमबत्ती भी तलाश कर खड़े होंगे जोर-जोर से तालियां भी बजाएंगे, जय जयकार भी करेंगे, आपका गुणगान भी करेंगे, ऐसा एकांत में होगा सब दूरी बनाकर करें तो ही देश हित में होगा। आपने लोगों को एक बार फिर ऐसा मौका दे दिया है जहां समाधान नहीं समस्या खड़ी है। 
    सोचो उनके बारे मे जो लाखों लोग बिना छत बिना बालकनी वाली चार दिवारी सिमटे सहमे हैं। सोचना उनकी जिंदगी के बारे में जो बिना साधन बिना सवारी के सिर पर बोझ लिए रेल की पटरियों को सहारा बना सफर में हैं कि कभी तो घर आयेगा। सोचो उस गरीब जिसका चूल्हा उसके दिल जैसा ठंडा हो गया है सोचो जरा जो एक कमरे में कैद है वो सब सोच रहे थे कि देश का नायक आएगा राहत की घोषणा होगी, किसी खोज से नई रिसर्च से पर्दा उठेगा, वैज्ञानिकों की मेहनत की डॉक्टरों की सेवा को सलाम सजदा होगा, अफसोस उम्मीद बुझ गई उन करोड़ों भारतीयों की और आपका दिया जल गया। मुबारक हो आपको यह दिया बाती का खेल, इस इवेंट में कहीं भी राहत नहीं दिखती, कहीं भी कोई उम्मीद की रोशनी नहीं खिलखिलाती, यह सब भ्रम है, धोखा है, ढोंग है, नाटक है एक तरह से ढकोसला है इससे ज्यादा कुछ नहीं।
    दिया जलाकर छतों पर खड़े होने से कोई राष्ट्रभक्त हो जाएगा, मोमबत्ती को उठा लोगों का हुजूम कोरोना से जीत जाएगा, एक साथ लाखों करोड़ों दिए जल जाने से कोरोना जल जाएगा खाक हो जायेगा ये किसने सिखा दिया आपको और क्यों आप हमें सिखा रहे हैं? थाली और ताली के बाद यह बेमौसम दिवाली जो आप लाए हैं यह दिल जलाने वाली है, अश्कों की बरसात में दियो के लड़ी की घड़ी नहीं है ये, हिंदुस्तानियों की जिंदगी का सवाल है, ध्यान रखना नाकामियों के पक्ष में रोशनी कभी नहीं खड़ी होती साहब, दिया जलता है चेहरा भी दिखता है और जब चेहरा दिखेगा तो झूठ न छुपा पाएगा, ये सच साफ दिखायेगा गैर जिम्मेदारी, लापरवाही, चूक भी बेशक दिखायेगा। ये जिम्मेदारी का जिम्मेदार बनने का समय है जो भी मन में आये वो बात करने का समय नहीं है साहब, ये समय है डॉक्टरों को, नर्सों को पुलिसकर्मियों को सुरक्षा, सहयोग, सहायता सांत्वना देने का उनके बाद उनके परिवार उनके घर का क्या होगा? इस जिम्मेदारी को बताने का, सीखें केजरीवाल से जो डॉक्टर सफाई कर्मचारी सिपाही और कोरोना योद्धा  जो जन सेवा में जान गवायेंगे, वो शहीद कहलायेंगे और उनके बाद उसके परिवार को दिल्ली सरकार, केजरीवाल की सरकार एक करोड़ की सौगात देगी  आपने गरीबों के लिए क्या किया? क्या किया आपने गरीबों के लिए? हर गरीब चीख चीख कर आपसे पूछता है, आप तो गरीबों के मसीहा हैं आपने तो बचपन में गुरबत को देखा है, आप तो गरीबी के किस्सों को शान से सुनाते हैं और उन कहानियों को सुनाते सुनाते आंसू भी बहाते हैं फिर भी क्यों नहीं करते, क्यों नहीं गरीबों का दर्द देखकर अब आपके आंखों से आंसू निकलते हैं। सड़क पर निकले हुए गुरबत के मारो को देखकर आप का दिल पसीज जाता है। गरीब के बुझे हुए चूल्हों को देखकर आप  अब क्यों नहीं रो पड़ते हैं, क्यों नहीं आप गरीब के साथ खड़े होते हैं, याद है न नोटबंदी में बैंक के सामने कतार, उस कतार में खड़ा हुआ हर गरीब लाठियों की नोक पर था, पुलिस के बूट तले था, आज फिर आपकी मेहरबानी के कारण गरीब सड़कों पर है एक बार फिर खाकी का खौफ है, गरीब क्या जूतों के लिए ही बना है? आप गरीब को राहत कब देंगे? गरीबी का तमाशा बना कर रख दिया है, फिर उस पर ताली थाली के बाद दिवाली के धूम की बंपर घोषणा। अरे साहब आप क्या क्या कराओगे हम भारतवासियों से? क्या कहें अब भक्त छाती पीट सकते हैं अंधभक्त मोमबत्ती के मोम में हाथ जलाते रोशनी की कल्पना कर सकते हैं। भीड़ इस मेले का हिस्सा बन सकती है, लेकिन ये उम्मीद की रोशनी नहीं है, धोखा है, भ्रम है, नाटक है एक तरह से ढकोसला है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। दिया जला के छत पर खड़े होने से कोई राष्ट्र भक्त हो जाएगा, मोमबत्ती को थाम लेने से कोई देशभक्त बन जायेगा। देशभक्ति आपके हुक्म की तामिल है तो ये सही नहीं है।

You can share this post!

Comments

Leave Comments