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पंजाब-हरियाणा

जब पीएम अटल ने कहा था जो आपको अच्छा लगे उसे वोट दे देना.....

पलवल (सुन्दर कुंडू):यह बात सन 1999-2000 के विधानसभा चुनावों की है जब बंसीलाल की हविपा की सरकार गिर गयी थी |जिसके चलते प्रदेश में विधानसभा के चुनाव चल रहे थे तो इनेलो भाजपा गठबंधन के सयुंक्त प्रत्यासी के लिए ओमप्रकाश चौटाला ने पलवल में कर्ण सिंह दलाल को चुनाव हराने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पलवल में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करने के लिए बुलाया था |लेकिन जब उस जनसभा में कर्ण दलाल के खिलाफ बोलना सुरु किया तो पलवल विधानसभा क्षेत्र की जनता अपने नेता के खिलाफ बोलना बर्दास्त नही कर सकी और वहीं पर उस जनसभा में काले झंडे दिखाने सुरु कर दिए |

अटल बिहारी वाजपेयी को जनता का हंगामा देख अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए यह कहना पड़ा कि कोई बात नही आपको जो अच्छा लगे उसे वोट दे देना तब जाकर जनता शांत हुई और उस चुनाव में कर्ण सिंह दलाल विधायक बने |     हुआ यूं कि बंसीलाल की सरकार गिर जाने के बाद ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री बनना चाहते थे क्योँकि बंसीलाल सरकार को गिराकर आये कुछ विधायक ओमप्रकाश चौटाला के पास पहुंच गए और उन्हें समर्थन देने की घोषणा कर दी ,और 22 विधायकों ने कर्ण दलाल को अपना नेता चुना |जब 22 विधायकों ने कर्ण दलाल को अपना नेता चुना तो ओमप्रकाश चौटाला को यह बात नागवार गुजरी की पलवल जैसे इलाके का विधायक सीएम बनने जा रहा है|और कर्ण दलाल सीएम बनने से रह गए|इसी के चलते  कर्ण दलाल ने ओपी चौटाला को भी सीएम नही बनने दिया |इसी बात को लेकर ओमप्रकाश चौटाला और कर्ण दलाल के बीच राजनैतिक जंग मुछो की जंग बन गयी और दोनों एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए|    बड़े बुजुर्ग बताते है  कि इस घटनाक्रम के बाद कर्ण सिंह दलाल को  तत्कालीन हरियाणा के भाजपा के प्रभारी नरेंद्र मोदी (जो अब देश के प्रधानमंत्री है) ने उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रैली में कर्ण सिंह दलाल को टिकट का आस्वासन देकर  भाजपा में शामिल कराया था,कर्ण सिंह दलाल को ओमप्रकाश चौटाला ने ये कहा भी था भाजपा में शामिल मत होना में तुम्हे टिकट नही लेने दूंगा |जब कर्ण सिंह दलाल ने नरेंद्र मोदी को ये बात बताई तो उन्होंने कहा कि भाजपा ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी नही हमारी पार्टी है आप भाजपा में शामिल हो हम आपको टिकट देंगे |लेकिन अंत में वही  हुआ और इनेलो भाजपा का गठबंधन हो गया और ओमप्रकाश चौटाला ने गठबंधन में सबसे पहले पलवल की टिकट मांग ली |और कर्ण सिंह दलाल की टिकट कट गई |

आक्रोशित कर्ण दलाल भाजपा से टिकट कटने के बाद रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की टिकट लेकर आये और जनता ने उन्हें ही विधायक चुना|इसी चुनाव में क्योंकि कर्ण दलाल और ओमप्रकाश चौटाला में चौधर की लड़ाई बन गयी और ओमप्रकाश चौटाला ने कर्ण दलाल को हराने के लिए ना केवल तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रैली करवाई बल्कि ओपी चौटाला जो हरसंभव प्रयास कर सकता था उन्होंने किये |लेकिन बावजूद इसके पलवल क्षेत्र की जनता ने कर्ण सिंह दलाल को भारी वोटों से जिताकर  औऱ इनेलो भाजपा के सयुंक्त प्रत्यासी देवेंद्र चौहान को 25000 हजार वोटों से हराकर कर्ण दलाल को चंडीगढ़ की विधानसभा में भेजा|कर्ण सिंह दलाल इस चुनाव के बारे में बताते है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की जनसभा सीनियर सेकंडरी स्कूल में थी जब उन्होंने मेरे खिलाफ बोलकर मेरे खिलाफ लोगो से वोट मांगने सुरु किये तो जनता ने पीएम की रैली में काले झंडे दिखाने सुरु कर दिए|लेकिन अटल बिहारी जी समझदार इंसान थे ,अच्छे इंसान थे वो जनता की भावनाओं को तुरंत समझ गए और उन्होंने मंच से ही कहा कि में किसी की वोट मांगने नही आया तुम्हे जो अच्छा लगे उसे वोट दे देना |और इसी चुनाव में पलवल की जनता ने मुझे तीसरी बार चुनकर विधानसभा भेजा|और उस समय की चौटाला परिवार और कर्ण दलाल की जंग समय दर समय सामने आ जाती है |2000 में हुए इस चुनाव के बाद ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन पलवल की सीट ना जीत पाने का उन्हें बहुत मलाल था |जिसके चलते कर्ण सिंह दलाल को सत्ता के सामने अनेक तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ा ,कर्ण दलाल और उसके परिवार पर तरह तरह के मुकदमे दर्ज कराए गए |लेकिन दलाल सबसे बच निकले और फिर  ओमप्रकाश चौटाला से उन्ही का बदला जेबीटी भर्ती घोटाले में लिया और ओमप्रकाश चौटाला को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा|इसी घटनाक्रम में सुरु हुई जंग अब की कई बार देखने को मिल जाती है 2018 में विधानसभा में अभय सिंह चौटाला करन दलाल के बीच हुआ जूता प्रकरण इसी का ताजा उदाहरण है|चौटाला समेत उनके परिवार के खिलाफ चल रहे आय से अधिक सम्पति व अन्य मामलों में कर्ण सिंह दलाल उनके खिलाफ गवाह है |

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