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पलवल के मतदाताओं ने कई बार सत्ता लहरों में चुनाव लड़ी पार्टियों को भी दरकिनार किया,पलवल के मतदाताओ ने कई बार पार्टीयो को छोडकर निर्दलीयों को जिताकर  पहुँचाया विधानसभा 

पलवल,2 अक्टूबर  (सुन्दर कुंडू) : विधानसभा चुनाव में यू तो प्रत्याशी बड़े बड़े राजनीतिक दलों की टिकट मांगने के लिए  जोड तोड़ में जुटे हुए हैं । लेकिन पलवल जिले की जनता को भाजपा व काग्रेस की राजनीति रास नही आती। पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की तीनो सीटो पर भाजपा को मुंह की खानी पडी हैं। जिले की 3 विधानसभा सीटों पर मतदाताओ ने कई बार बडी पार्टीयो को छोडकर निर्दलीय पर भरोसा जताया हैं। यह प्रत्याशी जनता के दम पर और अपने रसूख के चलते निर्दलीय के रूप में विधानसभा तक पहुंच चुके हैं।

1967 से लेकर आज तक अगर विधानसभा चुनाव की बात करें तो पलवल जिले की पलवल,होडल(पहले हसनपुर) ,हथीन विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीयों ने भी अपना परचम लहराया है । पलवल विधानसभा चुनाव में करन दलाल व हथीन से हर्ष कुमार हविपा से विधायक बन चुके हैं जबकि उदयभान इनलो से विधायक चुने गए। हथीन विधानसभा क्षेत्र में दो बार के चुनाव को छोड़ दें तो ज्यादातर कांग्रेसी पार्टी के प्रत्याशीयो को करारी हार का सामना करना पड़ा है ।वही दूसरे दल भी यहां अपनी पैठ बनाते रहे कई बार ऐसे मौके भी आए हैं जब जनता ने ऐसे नेताओं को निर्दलीय के रूप में चुना जो उनके सुख दुख में उनका साथ निभाते रहे हैं। इस बार भी माना जा रहा है कि कई दिग्गज टिकट न मिलने पर निर्दलीय के रूप में चुनावी ताल ठोक सकते हैं। 1967 में पलवल विधानसभा क्षेत्र से जहां निर्दलीय के रूप में चौधरी धनसिंह, व हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से गया लाल ने निर्दलीय के रूप में चुनाव जीतकर अपना परचम लहराया था । वहीं 1968 में हथीन विधानसभा क्षेत्र से हेमराज  सहरावत ने निर्दलीय के रूप में चुनाव जीतकर अपनी पहचान कायम की ।

1972 में निर्दलीय चुनाव लड़े रामजीलाल डागर जीत दर्ज कर विधायक बन चंडीगढ़ पहुंचे। सन 2000 के चुनाव में हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से गया लाल के पुत्र उदय भान ने निर्दलीय के रूप में चुनावी समर जीतकर यह दिखा दिया कि वह बिना टिकट के चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं । वहीं 2005 के चुनाव में हथीन  से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चौधरी हर्ष कुमार ने चुनाव जीतकर कई बडे नेताओ को पराजित किया था। 2009 में हथीन से निर्दलीय के रूप में चौधरी जलेब खान ने अपना परचम लहरा कर कांग्रेस सरकार में मुख्य संसदीय सचिव पद पाकर सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। पलवल जिले की राजनीति कई दिग्गजों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनमें पलवल से चौधरी करण सिंह दलाल, होडल से उदय भान, हथीन से चौधरी हर्ष कुमार का अपने-अपने क्षेत्र में खासा असर माना जाता हैं।  इस बार भी यह तीनों नेता फिर एक बार चुनावी समर में ताल ठोकने जा रहे हैं। चुनाव में भाजपा, कांग्रेस,जजपा,  बसपा, इनेलो, आम आदमी पार्टी सहित अन्य प्रत्याशियों ने चुनाव प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे । लेकिन मुख्य मुकाबला तीनों विधानसभा क्षेत्रों में त्रिकोणीय दिखाई दे रहा है हथीन विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां 1967 में काग्रेस से देवीसिह तेवतिया,1991 में चौधरी अजमत खान ही काग्रेस सा विजयी हुए हैं। बाकी चुनाव  में कांग्रेसियों के प्रत्याशी को हमेशा यहां हार का मुंह देखना पड़ा है।

सबसे पहले 1967 में हथीन विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी पार्टी से चौधरी देवी सिंह तेवतिया ने चुनाव जीतकर गोत्र पाल के नारों को खोखला साबित कर दिया क्योंकि तेवतिया पाल के एकमात्र गांव कौंडल से होने के बावजूद हथीन से पहले विधायक चुने गए। एक बार फिर भाजपा व कांग्रेस में टिकटों की मारामारी मची हुई है जबकि पलवल जिले के अंदर सबसे पहले जननायक जनता पार्टी ने पूर्व में मंत्री व  निर्दलीय के रूप में अपना लोहा मनवा चुके हर्ष कुमार को अपना प्रत्याशी उतार कर सबसे पहले चुनावी माहौल गरमा दिया है ।इतना ही नहीं पलवल की जनता ने कई बार सत्ता लहरों में चुनाव लड़ी पार्टियों को भी दरकिनार किया है। सत्ता पक्ष को तवज्जों ना देकर अन्य प्रत्यासियों को जिताकर चंडीगढ़ की विधानसभा में भेजने का काम किया है। 2014 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो पलवल के मतदाताओं ने भाजपा की मोदी लहर को दरकिनार करते हुए विपक्षी पार्टियों के नेताओं को  जिताकर चंडीगढ़ भेजा। जिनमे दो सीटों पर कांग्रेस तो एक सीट पर इनेलो ने कब्जा किया। पलवल और होडल से कांग्रेस के कर्ण दलाल करण दलाल और उदयभान विधायक बने तो हथीन से इनेलो के  केहर सिंह रावत को जनता ने  जिताकर पलवल से भाजपा की मोदी लहर को बेअसर किया। 

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