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पंजाब-हरियाणा

पलवल मे भाजपा के गले की फांस बने पूर्व विधायक सुभाष  चौधरी |

पलवल सुंदर कुंडू :-प्रदेश मे विधानसभा चुनाव करीब है चुनाव लडने के इच्छुक  उम्मीदवार  चन्दीगढ जाने की परची  पाने के लिए जोर आजमाइस मे लगे हुए है आये दिन प्रदेश के राजनितिक  समीकरन बन ओर बिगड  रहे है हर  दिन ज़हा कुछ नेता जहां अपनी टिकट के लिए पार्टी आलाकमान  की चौखट  चुम रहे है वही कुछ दलबदल कर  दुसरे दलों  मे अपने लिए सम्भावनायें  तलाश  रहे है ऐसा ही हाल कुछ पलवल मे है जहां नेता टिकट के लिए हरसंभव  प्रयाश मे जूटे  है की कैसे भी टिकट मिल जाये |पलवल मे सबसे ज्यादा फजिहत सत्तारूढ पार्टी के लिए है जहां पर  पहले से ही लगभग आधा दर्जन  नेता टिकट मांग रहे है ओर पार्टी आलाकमान के लिए हरियाना  की इस  सबसे हॉट सीट पर  पहले ही अपनी पार्टी के नेताओं मे से करन सिंह दलाल के सामने ऐसा कोई प्रत्यासी  नजर नही आ रहा था

जो करन दलाल का मुकाबला कर  सके क्यौंकी पिछली बार भी करन सिंह दलाल मोदी लहर के बावजुद भी भाजपा प्रत्यासी  दीपक मंगला को पटखनी  देकर अपनी सीट निकालने मे कामयाब हो गए थे |ओर राजनितिक विश्लेशक यह मानते  है की चुनाव लडने का जो कौशल करन सिंह दलाल के पास है वो प्रदेश के शायद  किसी ओर नेता मे हो साथ ही उनका जनता के बीच मे रहना उनके इस  कौशल को धार देता है विपक्ष मे होने के बाद भी जनता की समास्याओं के समाधान  का जो तरीका उनके पास है वो सत्ताधारी नेता भी नही कर  पाते यही कारण है की प्रदेश मे आयी समय दर  समय सत्ता लहरों  के खिलाफ चुनाव लड़कर पांच बार विधायक बनने का अनुभव ओर गौरव उनके पास है |ओर अगर बात करे भाजपा की तो अभी कोई प्रत्यासी सपस्ट  नजर नही आ रहा की भाजपा पलवल के रथ  का सार्थी किसे बनायेगी जो करन सिंह दलाल के विजय  रथ को रोक सके लेकिन पलवल के राजनितिक समिकरनो मे इन  दिनो जो सियासी घटनाक्रम  चल  रहे है वो भाजपा प्रत्यासी  की चिंता बढा  रहे है बिते दिनो  इनेलो से पूर्व विधायक सुभाष चौधरी द्वारा भाजपा से चेतावनी  भरे  लहजे  ने भाजपा नेताओं की नींद  उडा  रखी है |क्यौंकी भाजपा अगर पूर्व विधायक को टिकट देती है तो पुराने भाजपा नेता किसी भी कीमत  पर  सुभाष चौधरी का साथ नही देंगे ओर अगर भाजपा ने सुभाष चौधरी को टिकट नही दिया तो उन्होने किसी अन्य  दल  या आजाद चुनाव लडने की घोषणा पहले ही कर  दी है अब सुभाष चौधरी के ब्यानो  के बाद बदले  राजनितिक समीकरनो पर  गौर की जाए तो इसका सीधा सीधा फायदा मौजुदा  विधायक ओर कांग्रेस प्रत्यासी  करन दलाल को होगा |

अगर बात करे पिछले चुनाव की तो पलवल मे सुभाष चौधरी ही करन सिंह दलाल ओर भाजपा की हार का कारण बने थे जो उन्होने 36000 वोट हासिल की थी उनका नुक़सान भाजपा प्रत्यासी को ही हुआ था क्यौंकी करन दलाल के पास जो अपना वोट बैंक है उसमे कोई भी सेंध नही लगा सकता चाहे वो किसी भी पार्टी का कितना ही बडा नेता हो |अब यह देखने वाली बात होगी की भाजपा पूर्व विधायक के दबके  मे आकर उनहे टिकट थमाती  है  य़ा फिर 15 सितंबर की जो ड़ेडलाइन  सुभाष चौधरी ने भाजपा को दी है उसके अनुरूप वो किसी पार्टी य़ा आजाद चुनाव लडने की घोषणा करते है वैसे कयास ये भी लगाये जा रहे है की अगर भाजपा पूर्व विधायक सुभाष चौधरी को टिकट नही देती है तो वो जजपा की टिकट भी ला सकते है क्यौंकी जजपा के पास भी कोई मजबुत प्रत्यासी  भी पलवल मे नही है ऐसे मे जजपा सुभाष चौधरी को टिकट थमाने  मे संकोच नही करेगी साथ ही जजपा ओर बसपा का गठबंधन अब टूट  चुका है ऐसे मे सियासी गलियों  मे बसपा से पूर्व मंत्री करतार  भडाना  के चुनाव लडने की चर्चायें  भी जोरो पर  है | लेकिन एक बात साफ जाहीर है की इन  घटनाक्रमो  के चलते करन सिंह दलाल एक बार फिर सभी को पटखनी देकर भाजपा के 75 पार के नारे को तोडते  हुए  चन्दीगढ की विधानसभा मे जायेंगे 

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