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पंजाब-हरियाणा

क्या कुंद हो गई गब्बर के तेवर की तलवार!

   अनिल विज के ढीले पड़ने से निरंकुश हुए उनके अधिकांश कर्मचारी

चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में दबंग छवि रखने वाले गब्बर के नाम से मशहूर गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का रुतबा धीरे-धीरे फीका पड़ता जा रहा है। खट्टर सरकार पार्ट-१ में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए श्री विज ने अपनी राजनैतिक छवि में चार चांद लगा लिए थे। पार्ट-२ सरकार के शुरुआत में भी विज अपनी चिर-परिचित शैली से अपने विभाग के अधिकारियों को मुस्तैद किए हुए थे। गृह मंत्रालय मिलने के बाद श्री विज द्वारा पुलिस थानों के औचक निरिक्षण और खामी पाये जाने पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देने से बिगड़ैल पुलिस आम लोगों से तहजीब से पेश आने लगी थी। 


जबकि जग-जाहिर है कि हरियाणा पुलिस अधितर आम सज्जन लोगों से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी। विज के शुरुआती तेवरों से प्रदेश में पुलिस की छवि में सुधार आने लगा था, लेकिन अनिल विज के तेवर ढीले क्या हुए उनके विभाग के पुलिस एवं स्वास्थ्य कर्मचारी अपने पुराने ढर्रे पर लौट आये। आज प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीज के ईलाजों में बरती जा रही कोताही और पुलिस विभाग के अधिकतर कर्मचारियों का तानाशाही रवैया मंत्री अनिल विज की गब्बर रूपी छवि को दागदार करने के लिए काफी है। हालांकि बीच में मंत्री विज के चोटिल होने से उनके दौरे बंद हो गए थे, लेकिन क्या उनका रौद्र रूप सिर्फ एक मुखैटा साबित हुआ? क्योंकि बेड रेस्ट के दौरान भी वे मंत्री ही तो थे। आज उनकी दबंग शैली को ऐसा क्या हो गया जो उनके अधिकांश विभागीय कर्मचारी अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चले हैं। 
दरअसल पार्ट-२ सरकार में अनिल विज को पूर्व से भी ज्यादा पॉवरफुल मंत्री बना दिया गया। उनको गृह जैसे ताकतवर मंत्रालय से नवाजा गया।

इसमें गुप्तचर विभाग को लेकर सीएम खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज में खूब तलवारें खिंची। यह विवाद हरियाणा सिविल सचिवालय चण्डीगढ़ से निकल कर सड़कों पर आ गया। इस विवाद के मीडिया की सुर्खी बनने के बाद पार्टी हाईकमान ने हस्तक्षेप किया और कहीं न कहीं इस विवाद में अनिल विज को नीचा देखना पड़ा क्योंकि गुप्तचर विभाग गृहमंत्री के पास न रहकर सीएम के अधिकार क्षेत्र में आ गया। मानो या न मानों इसके पश्चात अनिल विज के तेवर भी ढीले होते चले गये। जिसका परिणाम यह निकला कि इनके विभाग के ज्यादातर कर्मचारी निरंकुश हो गये। बहराल लोगों में अनिल विज के ठंडे पड़े तेवरों की खासी चर्चा है। अब देखना यह है कि अनिल विज का गब्बर रूप प्रदेश के लोगों को कबतक देखने को मिलेगा।

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