• 06:37 am
news-details
पंजाब-हरियाणा

हरियाणा में मध्यवती चुनाव की आहट!

  बगावत कर सकते हैं जजपा-भाजपा के विधायक: सूत्र


चंडीगढ़। हरियाणा में जजपा-भाजपा सरकार अभी अपने हनीमून कार्यकाल से निकली ही है कि सरकार में बगावत के सुर ऊंचे होने लगे हैं। जजपा के अपने आधे विधायक पार्टी और सरकार से दामन छुड़ाने के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा में भी अंदरूनी तौर पर सब ठीक नहीं चल रहा है। भाजपा के अपने करीबी आधा दर्जन विधायक सरकार के रवैये से नाखुश बताये जाते हैं। भाजपा पार्टी के  एक विधायक असीम गोयल ने तो खुलेआम सरकार की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह् लगाते हुए बीते दिनों धरने पर भी  बैठ गए थे। 


जजपा में विधायकों के बगावती सुर पिछले एक पखवाड़े से मुखर होते रहे हैं। विधायक रामकुमार गौतम एवं टोहाना विधायक देवेन्द्र बबली ने तो कई बार अपनी पार्टी के आका तथा राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर पार्टी के नेताओं के साथ भेदभाव का आरोप तक लगा दिया। विधायक गौतम ने तो मीडिया के सामने आकर जजपा सुप्रीमो श्री चौटाला को लालची तथा सरकार का माल डकारने वाला उपमुख्यमंत्री तक कह डाला। सूत्र बताते हैं कि जजपा के चार-पांच विधायक पार्टी में घुटन महसूस कर रहे हैं। जो कि कभी भी पार्टी को टाटा-बाय-बाय करने में संकोच नहीं करेंगे। कमबरती यही हाल भाजपा में भी पनप रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक विधायक ने बताया कि राज्य में अफसरशाही पूरी तरह हावी है। अधिकारी अपनी मनमानी करने पर तुले हुए हैं। सरकार में विधायकों का कोई रुतबा नहीं है। छोटे से छोटा अधिकारी भी उन्हें धत्ता बता देता है। राज्य के कई विधायकों ने कई बार मुख्यमंत्री से अधिकारियों के मनमानी रवैये की शिकायत की, लेकिन बावजूद इसके अधिकारियों में कोई बदलाव नहीं आया। उक्त विधायक का यह भी कहना है कि सरकार की नीतियों से राज्य की जनता बुरी तरह त्रस्त है। किसान हो या व्यापारी वर्ग, मजदूर हो या छोटा दुकानदार सभी सरकार की नीतियों से तंग हाल में हैं। उक्त विधायक का यह भी दावा है कि भाजपा पार्टी के कई विधायकों में असंतोष की ज्वाला भड़क रही है, जो कभी भी फूट सकती है।


जजपा और भाजपा के विधायकों में फैल रहे असंतोष से सहर्ष अंदाजा लगाया जा सकता है कि गठबंधन की यह राज्य सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायेगी। अतिविश्वनीय सूत्रों का तो यह भी दावा है कि सत्तासीन दोनों ही पार्टियों के अंसतुष्ट विधायक कभी भी बगावत का बिगुल बजाते हुए सरकार को धाराशाही कर सकते हैं। दावा यहां तक भी है कि ऐसे अंसतुष्ट विधायक कांग्रेस के सम्पर्क में भी हो सकते हैं। 


यदि इन दावों से सच्चाई निकल कर आती है तो यह कहना गलत नहीं होगा कि बगावती विधायकों के सहारे कांगे्रस राज्य की सत्ता पर अपना झण्डा बुलंद कर दे, या फिर यह कहें कि प्रदेश में मध्यवती चुनाव की आहट शुरु हो गई है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बहराल राजनीतिक पंडित भी उपरोक्त बातों से सहमत बताये जाते हैं। यानि अगले एक साल के अन्दर हरियाणा की राजनीति अपने इतिहास को दोहरा सकती है।

You can share this post!

Comments

Leave Comments