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पंजाब-हरियाणा

हथीन विधानसभा क्षेत्र मे भाजपा के लिए आसान नहीं  होगा प्रत्यासी का चयन  

सुन्दर कुंडू/एनबीएस

हथीन। विधानसभा चुनाव सर पर  हैं, चुनाव आयोग कभी भी चुनावों  का बिगुल फूंक सकता है इसके मददेनजर  संभावित  प्रत्यासियों ने टिकट के लिये जोर आजमायश शुरू दी है। ऐसा ही कुछ  नजारा  हथीन क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां  दर्जनों  प्रत्यासी  चंडीगढ  जाने की तैयारी  में हैं लेकिन इस  सीट पर सबसे ज्यादा फजीहत  सत्ताधारी पार्टी  के लिये प्रत्यासी का चयन करना  है क्योंकि  इस  सीट से भाजपा के लगभग आधा दर्जन  नेता  चुनावी समर में कूदने की तैयारी में हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान  के लिये प्रत्यासी का चयन करना टेढी खीर साबित होने वाला है 


क्योंकि टिकट कट  जाने की स्थिति  में स्थानीय  भाजपा नेता पार्टी के लिये घातक  सिद्ध हो सकते  हैं। अगर हम  बात करें  भाजपा के इन  संभावित  प्रत्यासियों  की तो इनमे  पूर्व विधायक केहर  सिंह  रावत, पूर्व विधायक रामजीलाल  डागर  के पुत्र  प्रवीन  डागर, जिला बार ऐसोसिएसन  पलवल  के पूर्व प्रधान  धर्मेन्द्र तेवतिया और कर्नल  राजेंदर  सिंह रावत मुख्य दावेदार  हैं।


हथीन विधानसभा क्षेत्र में इन  चारो नेताओं ने टिकट के लिए अपना ऐढी  चोटी का जोर लगाया हुआ है। अगर बात करें पार्टी प्लेटफॅार्म  की तो कर्नल  राजेंदर रावत  की दावेदारी  सबसे मजबूत नजर आ रही है। जिन्होंने 2014 के चुनाव में इनेलो  का दामन  छोड भाजपा का दामन थामा था जो पिछले  लम्बे समय से पार्टी के लिए काम कर  रहे हैं। कर्नल  रावत  ने भाजपा के कई मुख्य पदों पर  रहते हुए पार्टी संगठन की मजबूती के लिए जो कार्य किए हैं वो पार्टी आलाकमान से छिपे  नहीं  हंै । वहीं दूसरी ओर केहर सिंह रावत  विधायक रहते हुए अपने पद से इस्तीफा देकर  भाजपा मे ंशामिल हुए हैं वो भी टिकट की रेस  मे  हैं। धर्मेन्द्र तेवतिया भी पार्टी आलाकमान के सामने अपनी मजबूत दावेदारी जता  रहे हैं जिसकी  बडी  वजह युवाओं में उनकी अच्छी पकड है । युवाओं मे जो धर्मेन्द्र तेवतिया की पैठ  है वो ओर किसी भी प्रत्यासी की नहीं है। और वो मुख्यमंत्री की जन  आशीर्वाद यात्रा में मुख्यमंत्री के समक्ष  युवाओं के दम  पर  अपनी शक्ती का प्रदर्शन  कर भी चुके हैं। जिसे मुख्यमंत्री ने खूब सराहा था। 


वहीं अगर बात करे प्रवीन डागर की तो प्रवीन डागर पूर्व विधायक रामजीलाल डागर के पुत्र  हैं और केन्द्रिय मंत्री कृष्णपाल  गुज्जर  के करीबी हैं उनके पिता रामजीलाल डागर की शरीफ  छवी भी उनके लिए फायदेमन्द साबित होता नजर आ रहा है। अब यह देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा किसे अपने रथ मेंं सवार कर चुनावी समर में उतारती है। क्योंकि सभी प्रत्यासी  टिकट के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर  रहे हैं और टिकट  कटने  पर  बगावत  कर  पार्टी के खिलाफ चुनावी बिगुल बजा सकते हैं।

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