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पंजाब-हरियाणा

कृषि कानूनों से देश की खाद्य सुरक्षा को खतरा : श्रीपाल भाटी

 

सैंकड़ों किसान,मजदूर और कर्मचारियों ने कृषि कानूनों के विरोध में जिला उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन


पलवल,14 दिि  (सुन्दर कुंडू) : किसान संघर्ष समन्वय समीति  के आह्वान पर तीन किसान विरोधी कानूनों व बिजली संशोधन बिल की वापिसी की मांग को लेकर लगातार 19 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे देश के किसानो के साथ एकजुट्ता प्रकट करते हुए जिले के सैंकड़ों किसान,कर्मचारी व मजदूरों ने उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की तथा उपायुक्त के नाम प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के बाद सभी कार्यकर्ता उपायुक्त कार्यालय से जलूस निकालकर केएमपी इंटरचेंज पर बैठे किसानों के धरने में शामिल हुए। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राजेश शर्मा,सीआईटीयू के जिला प्रधान श्रीपालसिंह भाटी,अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचन्दव किसान यूनियन के नेता रतनसिंह सौरौत की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित प्रदर्शन का संचालन योगेश शर्मा ने किया। उपायुक्त कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में सतीश भुर्जा,इनैलो के जिला अध्यक्ष अजीत बॉबी भी अपने कार्यकर्तओं के साथ मौजूद थे।
         जिला मुख्यालय पर प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए किसान व यूनियन नेताओं ने बताया कि ये कानून न केवल किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल देंगे।इन कानूनों से कृषि-जमीन व उत्पादन पर बड़े लाभ कमाने वाले कॉर्पोरेट को बेलगाम छूट मिल जाएगी। सरकार के अड़ियल रुख के कारण कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई राहत नही मिली है। नेताओं ने बताया कि इन कानूनों का मूल स्वरुप ही कृषि व जमीन को कॉर्पोरेट को सौंपने वाला है और केवल संशोधन करने से इनका मूल स्वरुप नहीं बदलेगा। अन्नदाता के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।सरकार उनकी बात सुनने की बजाय किसानों के ऊपर बल प्रयोग कर रही है।भाजपा नेताओं द्वारा किसानों के खिलाफ़ झूठा प्रचार किया जा रहा है।
        नेताओं ने बताया कि सरकार के मित्र उद्योगपति कृषि क्षेत्र में अग्रिम निवेश किए बैठे हैं। सरकार ने कॉर्पोरेट मित्रों को जमाखोरी का लाईसेंस दे दिया है।बाजार आधारित खरीद फरोख्त व्यवस्था,असीमित स्टाक और खेती में ठेकाप्रणाली लागू करके खेती का कार्पोरेटाइजेसन करना है। इन कानूनों के कारण मौजूदा मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य की स्थिति वैसी ही होगी जैसी आज बीएसएनएल की है। सरकार कह रही है कि मण्डी व्यवस्था खत्म नही होगी। लेकिन मण्डी में फसल खरीदने पर टेक्स लगेगा और मण्डी के बाहर टैक्स फ्री का खेल चलेगा तो मण्डी कितने दिन चलेंगी। बाद में मंडियों की जमीन कौड़ियों के भाव बेची जाएंगी। सरकार कह रही है कि  किसानों को अपनी फसल देश में कहीं भी बेचने की छूट मिलेगी,तो क्या कश्मीर का सेब दिल्ली तथा नागपुर के संतरे लखनऊ में पहले नहीं बिकते थे।नेताओं ने मांग की कि सरकार अपने अड़ियल रुख को छोडकर किसानों की मांगों का समाधान करके गतिरोध को खत्म करें।
         प्रदर्शन में किसान कर्मचारी नेता जितेन्दर तेवतिया,राजकुमार डागर,उदयवीर,किसान नेता ताराचन्द,रुपराम,डिगम्बर सिंह,सीआईटीयू के नेता दरियाब सिंह,भगीरथ बैनीवाल,उर्मिला रावत,रामरती चौहान,बाला व रघुबीर सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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