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भारत

किसान की करुण पुकार

 


धरने का पहाड़ 
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    सरकार लाभ हानि का पहाड़ा पढ़ा रही है उन्हें जो धरती का सीना चीर दाने दाने की तस्वीर, तकदीर, तदबीर बदलने का हुनर रखते हैं। उन धरती पुत्रों को बिन मांगी सौगात देने की नाजायज कोशिश में दिल्ली के चारों ओर धरने का पहाड़ खड़ा कर दिया है। जिसकी शिखाएं इस बहरी गूंगी अंधी सरकार तक अपनी बात रखने को हर दिन ऊंचाई और ऊंचाई को छू रही हैं। यह विरोध का पहाड़ संयम, साधना, समर्पण और सर्वस्व निछावर करने की प्रेरणा से दिल्ली को घेरे अडिग खड़ा है। इस पहाड़ की दहाड़ दुनिया में गूंज रही है यह महज आवाज नहीं हृदय के क्रंदन है जिसमें हर दिन एक अन्नदाता अपने प्राणों की आहुति दे इस धरने के पहाड़ को रोशन करने को मजबूर है। धरतीपुत्र इस बात पर आ खड़ा है कि प्राण से ज्यादा क्या लोगे? हम जान लुटाने आए हैं।


     किसानों को हल्के में ले हल की धार कुंद करने की नासमझी सरकार के समझदार रणनीतिकारों पर भारी पड़ रही है। किसान को उसकी ही जमीन पर अदृश्य फायदे गिनाने को मंत्रियों की फौज उतर गई है। जिन्होंने कभी हल बैल की जोड़ी को छुआ तक नहीं है वो गमले में पुदीना उगाने वाले पसीने को सोना बनाने वालों को तर्क दे रहे हैं, जिससे अब किसानों को फर्क नहीं पड़ रहा। वार्ता के बहाने यह कहा जा रहा है कि आप की जमीन आपकी ही रहेगी, सोचो इसमें नया क्या है? इसमें फायदा क्या है? और इसमें सरकारी एहसान क्या है? वो तो सदा सदा से ही किसानों की रही है, पीढ़ी दर पीढ़ी युगों से उनकी ही रही है और रहेगी भी। दूसरी बात यह कही जा रही है कि आप अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं पर कहाँ उन्हें न्यूनतम मूल्य मिलेगा? ऐसी एक जगह, एक बाजार, एक मंडी केंद्र सरकार देश भर में अन्नदाता को नहीं बता पा रही। किसान खुशहाल होगा आय दुगुनी होगी यह तीसरी रटी रटाई बात तोते की तरह भाजपा के मंत्री मुख्यमंत्री लगातार अनवरत बोले जा रहे हैं। अगर किसान आपके इस काले कानूनों से खुश होता तो मौत को चादर बना सिंधु बॉर्डर पर आ खड़ा ना होता।


    सूट बूट की सरकार बनाम अन्नदाता हलधर की इस अभूतपूर्व लड़ाई में आमजन का फायदा सबसे ज्यादा है। सरकार का यह बिल उद्योगपतियों के हितों में है जिन्होंने आनन फानन में आने वाले इस काले कनून से पहले ही लाखों टन का गोदाम बना, सैकड़ों एकड़ जमीन किसी दूसरे बहाने से कब्जा अपने नाम करा ली और अब रेल की पटरी बिछाने की तैयारी चल रही है। ऐसी कौन सी मजबूरी है, कौन सी चाल है जो कानून आने से पहले ही खेत को कारखाना और किसान को मजदूर बनाने की कवायद सरकार के चुनिंदा चहेते उद्योगपतियों ने शुरू कर दी है। देश देख रहा है सत्ता के लुटेरों की सियासत जो किसानों की जमीन लूटने पर आमादा है। रेल, तेल, जहाज जिस पर भी नजर गई उसे ही बेचने के बाद भी सरकार का जब पेट नहीं भर रहा तो यह धरती पुत्रों को बंधक बनाने का फंदा तैयार किया है, लेकिन धरती पुत्रों की एकता, धरती पुत्रों का साहस, धरती पुत्रों के हौसले ने हाड गला देने वाली सर्दी में खुद को झोंक धरने का पहाड़ खड़ा कर दिया है। उसे पार पाने की हिम्मत हिमाकत इस तानाशाही सरकार के बूते की बात नहीं लगती। शांति, सद्भाव, सादगी से बैठे यह देश के दिल दिल्ली को घेरे किसान अपने हक, अपने हल, अपने खेत, अपने मुल्क को गिरवी नहीं होने देना चाहते। वो जानते हैं कि इस कानून के पीछे मुनाफाखोरो की सोची-समझी सियासी चाल है, जिसके जाल में देश का हर नागरिक फंस जाएगा, अगर एक बार किसान फंस गया। किसान इस जाल के जंजाल में ना फंसे इसीलिए धरने का यह पहाड़ हर दिन अपना आकार लोगों की सहायता से बढ़ा रहा है। यह महज एक धरना नहीं है, यह किसानों का सम्मान है, किसानों की आजादी की जंग है, जिसमे में किसान अपने बीवी बच्चों समेत आ शामिल हुआ है। बेखौफ किसानों की टोली की यह बोली बेरहम सरकार कब तक अनसुनी करती रहेगी? देखना होगा। आज नहीं तो कल इस कातिल सरकार को झुकना ही होगा, किसान जीतेंगे किसान की जीत ही आखिर हिंदुस्तान की जीत साबित होगी, आम आदमी की जीत साबित होगी, यह रोटी की जीत है, थाली की विजय है, किसान यह जंग अगर हार गया तो थाली खाली हो जाएगी और खाली थाली की आवाज इस हुक्मरान को बहुत पसंद है।


     इस न्याय के युद्ध में, इस धरती बचाने की मुहिम में खेत खलिहान बचाने की कवायद में हम सबको धरने के इस अभूतपूर्व पहाड़ का हिस्सा बनना ही होगा  किसान की आवाज को ललकार बनाना ही होगा। इस हुंकार में शुमार होना ही होगा, क्योंकि बचेगा खेत तो बचेगा किसान, तभी बचेगी थाली यह लड़ाई निवाले को बचाने का अंतिम निर्णायक युद्ध है जो सरकार अपने चहेतों के साथ मिल आवाम के मुँह से छीनने पर तुली है। हम खेत नहीं बिकने देंगे, किसान को नहीं झुकने देंगे, अपनी रोटी को नहीं छिनने देंगे आओ संकल्प करें हम सब हिन्दुस्तानी इस महायज्ञ की आहुति बन सरकार के अभिमान को अहंकार को हरा दे।

 

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  • Parbriz Honda Civic V Saloon , 2020-12-20

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