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भारत

अन्नदाता इन्हें माफ करना

 

     गाली पानी की बौछार, हो रहा किसान शर्मसार। अन्नदाता इन्हें माफ करना यह नहीं जानते कितना बड़ा अपराध कर रहे हैं। देश का पेट भरने वाला हलधर आज खेत, खलिहान, घर, आंगन, परिवार छोड़ सड़क पर इसलिए आ खड़ा हुआ है कि भविष्य में देशवासी दाने-दाने को मोहताज ना हो, उनकी थाली खाली न रहे, कोई अन्न को ना तरसे, खेत बंधक ना हो, किसान पर व्यापारियों का राज ना हो।
     शहीद-ए-आजम का शहर अंगड़ाई ले लंबी लड़ाई को निकल पड़ा है। पानी की बौछार से ज्यादा शर्मसार कर रही है सरकार की जहरीली बोली जो गोली से भी ज्यादा गहरे घाव दे रही है। किसानों को गाली देने का जो सिलसिला चल पड़ा है रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। पहले खालिस्तानी फिर पाकिस्तानी और अब ठलुआ,देश की भूख मिटाने वाले को दिए गए हैं ये वो सरकारी तमगे है जिन्हें छाती पर टांग किसान ढोने को मजबूर है।
बिन मांगे दिए गए ये तीन अंधे काले कानून का विरोध करने पर गालियों की ये बौछार आने वाले दिनों में सरकार को बहुत भारी पड़ेगी। किसान देश की शान है, समाज का वरदान है, जिंदा है हम उन के दम पर यह किसान आंदोलन जल्द जन आंदोलन का रूप लेगा, जिसका परिणाम हरियाणा की सड़कों पर दिखने लगा है अंबाला में मुख्यमंत्री के काफिले के आगे किसानों ने ऐलान कर दिया कि "गोली गाली मंजूर नहीं"।  
   बातो के बतासो पर बिसात बिछाते सरकार के सियासतदानों को किसान ने साफ कह दिया है हां या ना जिसमें उनका स्पष्ट संकेत उन तीनों आनन-फानन में लाए गए जबरिया कानून को वापस लेना ही होगा। जो सरकार किसानों पर थोप खाली थाली बजवा वाह वाही करवाना चाहती है किसान इसे होने नही देंगे।उनका साफ कहना है है सरकार से "मर जाना मंजूर है, यह बिल हमें मंजूर नहीं"। इस संकल्प के साथ दिल्ली को घेरे बैठे किसानों को पूरी दुनिया देख रही है, किसानों के मान सम्मान पर सरकारी भाषा को भी दुनिया सुन ही रही है। संकल्प के धनी भगत सिंह के लाल हर दिन एक शहादत का अनचाहा कीर्तिमान भी बना ही रहे हैं, वह ललकार कर सरकार को कह रहे हैं "कितनी मौत से जागेगी, देखेंगे सरकार तुझे"।।    
        किसान अभी शांत है, वह सयंम में है, वह सब सह रहा है, नेताओं की गंदी राजनीति से अपने मंच को बचाए हुए हैं पर कब तक? वह अपनी ही सरकार से अपनी ही रिहाई मांग रहे हैं, खुद के खेतों की आजादी मांग रहे हैं, और अपने हाथों की मुक्ति। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में किसान सबका भला हो यही भावना लेकर सड़क पर आ बैठा है। सरकार जिद पर अड़ी रही तो किसान वक्त आने पर उसे भी सड़क पर ला देगा मेरे देश का किसान इतनी शक्ति रखता है। किसान दिवस पर किसानों की यह दुर्दशा कभी किसी सरकार ने नहीं की। किसान बिहार का, किसान यूपी का, किसान उत्तराखंड का, केरल का किसान, किसान को बांटने की सरकार की कवायद कहीं सरकार के लिए उल्टा ना पड़ जाए किसानों के लिए ललकार साबित ना हो जाए सरकार ऐसे उकसाने वाले बयान से खुद को बचाए रखें तो गनीमत होगी। भगवान ना करे कोई और सरकार किसानों की ऐसी दुर्दशा करने का  कभी साहस भी जुटा पाए ,किसान धरती का भगवान है भगवान से यही प्रार्थना है कि हे अन्नदाता इन्हें माफ करना यह किसान का कर्ज किसान का दर्द नहीं जानते।
 संदीप मिश्र

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