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पंजाब-हरियाणा

कृषि कानूनों के खिलाफ नाराजगी से नुकसान

हरियाणा में निकाय चुनाव में भाजपा को 
कांग्रेस को गुटबाजी ले डूबी

हरियाणा में बुधवार को घोषित 7 शहरी निकायों के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले रहे। चुनाव में भाजपा और जननायक जनता पार्टी (जजपा) की मौजूदा गठबंधन को करारा झटका लगा है। सत्ता में रहने के बावजूद यहां सात निकायों में से केवल दो में ही कमल खिल पाया। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच यह नतीजे भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं। वहीं, कांग्रेस गुटबाजी की वजह से सिर्फ एक निकाय में ही जीत हासिल कर पाई। परिणाम के बाद भाजपा और जजपा नुकसान के कारणों पर विचार-विमर्श करना होगा। वहीं, भाजपा के साथ के बावजूद शहरों में करारी शिकस्त मिलना दुष्यंत की पार्टी के लिए ठीक संकेत नहीं है। वहीं, कांग्रेस को भी एक के बाद एक हार के बाद कड़े कदम उठाने होंगे।

2 साल पहले क्लीन स्वीप किया था
दो साल पहले हुए पांच नगर निगमों यमुनानगर, करनाल, रोहतक, हिसार और कुरुक्षेत्र में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। हाल ही में नवंबर के पहले सप्ताह में हुए बरोदा उपचुनाव में भी भाजपा-जजपा हार गई थी और कांग्रेस की जीत हुई थी। इसके तुरंत बाद 7 शहरी निकायों में चुनाव हुए। मौजूदा गठबंधन सरकार के कार्यकाल के 4 साल शेष होने के बावजूद उसे केवल दो में ही जीत मिली।

अंबाला और सोनीपत हाथ से फिसले
पंचकूला नगर निगम और रेवाड़ी नगर परिषद में भाजपा भले ही नगर अध्यक्ष का पद हासिल करने में कामयाब रही, लेकिन अंबाला और सोनीपत नगर निगम भाजपा के हाथ से फिसल गए। सोनीपत में तो भाजपा-जजपा गठबंधन को कांग्रेस खासकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके राज्यसभा सदस्य बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा की पसंद के उम्मीदवार की जीत अपने आप में एक बड़ा झटका है।

अंबाला में हरियाणा जन शक्ति पार्टी जीती
अंबाला में पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की हरियाणा जन शक्ति पार्टी से उम्मीदवार उनकी पत्नी शक्ति रानी शर्मा चुनाव जीत गई। कुल मिलाकर तीन नगर निगमों पंचकूला, अंबाला व सोनीपत में से केवल पंचकूला ही भाजपा के हिस्से में आया।
उधर, सोनीपत नगर निगम में कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन बाकी शहरों में कांग्रेस भी चित होती नजर आई। रेवाड़ी नगर परिषद में भाजपा चुनाव जीती, मगर उकलाना, धारूहेड़ा और सांपला नगर पालिकाओं में गठबंधन की हार हुई और यहां निर्दलीय उम्मीदवार अध्यक्ष पद का चुनाव जीते। हालांकि इन पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी दावेदारी जताई है।

भाजपा को यहां हुआ फायदा
भाजपा के लिए फायदे की बात यह रही कि रेवाड़ी में पूर्व शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा प्रभारी थे, उनकी मेहनत रंग लाई। पंचकूला नगर निगम में भाजपा के मेयर पद के प्रत्याशी कुलभूषण गोयल का खुद का रसूख भी काम आया। भाजपा के वोट बैंक और अपने निजी संबंधों के चलते कुलभूषण गोयल कांग्रेस प्रत्याशी उपेंद्र कौर आहलूवालिया के मुकाबले महज 2057 मतों से ही चुनाव जीत पाए। कांग्रेस की अदंरुनी कलह का फायदा भी कुलभूषण को मिला है।

पंचायती राज चुनाव पर भी पड़ सकता है असर
भाजपा की हार की वजह किसान आंदोलन को माना जा रहा है। शहरी निकायों में काफी गांव आते हैं। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अब फरवरी में होने वाले पंचायती राज चुनाव पर भी इसका असर पड़ सकता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हरियाणा के बहुत सारे गांवों के लोगों ने भाजपा और जजपा का पूरी तरह से बहिष्कार कर रखा है। बीते दिनों जींद में 40 खापों की महापंचायत ने जजपा और निर्दलीय विधायक-मंत्रियों पर सरकार से समर्थन वापसी के लिए दबाव बनाने की बात कही थी। इसी बीच जजपा नेता एवं उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने खुद बयान दिया था कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात पर केंद्र सरकार राजी नहीं हुई तो वह खुद प्रदेश की सत्ता से बाहर होकर बैठ जाएंगे।
बावजूद इसके चार दिन पहले ही जींद के उचाना में लोगों ने दुष्यंत के लिए बनाया हेलीपैड खोद डाला और दुष्यंत शादी समारोह में आते-आते रह गए। दौरा रद्द करना पड़ा। इतना ही नहीं, अंबाला में नगर निगम चुनाव के प्रचार में आए खुद मुख्यमंत्री को किसानों का गुस्सा झेलना पड़ा था। उनके काफिले पर हमला करने के आरोप में दर्जनभर से ज्यादा किसानों पर नाम से केस दर्ज हुआ था।

रेवाड़ी में कैप्टन पर भारी पड़ा परिवारवाद
अब बात आती है कांग्रेस को हुए नुकसान की। रेवाड़ी के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव पर रेवाड़ी में परिवारवाद भारी पड़ा। निर्दलीय प्रत्याशी उपमा पार्टी के पुराने नेता रहे सतीश यादव की पत्‍नी हैं। वह यहां से टिकट मांग रहे थे लेकिन रेवाड़ी परिषद का फैसला पार्टी ने कैप्टन पर छोड़ा था। अजय यादव ने अपने भाई के बेटे की पत्नी विक्रम यादव को चुनावी रण में उतारने का फैसला लिया। नतीजा यह निकला कि 15 हजार 271 वोट हासिल कर विक्रम यादव तीसरे नंबर पर ही आ पाईं।

सैलजा पर फिर भाड़ी पड़े हुड्डा, 
विधायक दल की बैठक बुलाई
अंबाला और पंचकूला में कांग्रेस की हार और सोनीपत में जीत से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा पर भारी पड़े हैं। सैलजा ने अंबाला और पंचकूला में अपनी पसंद के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था। यहां हुड्डा को प्रचार के लिए भी नहीं बुलाया गया, जबकि सोनीपत में हुड्डा की पसंद और रेवाड़ी में कैप्टन अजय यादव की पसंद के उम्मीदवार दिए गए। हुड्डा सोनीपत में अपनी पसंद को जितवाने में कामयाब हो गए, जबकि बाकी जगहों पर कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई। हुड्डा का कहना है कि भाजपा ने एक निगम और एक परिषद जीती है, जबकि कांग्रेस ने सोनीपत में 14 हजार वोटों से जीत हासिल की है। अंबाला और पंचकूला में कांग्रेस की हार पर मंथन होना चाहिए। किसान आंदोलन के चलते भाजपा का सफाया हो गया है।

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