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पंजाब-हरियाणा

अंधभक्ति देश के लिए हानिकारक है

 

         दलभक्ति, व्यक्तिभक्ति, अंधभक्ति भक्तों के भक्ति की शक्ति देश के लिए कितनी हानिकारक है, यह बताने के लिए अमेरिका की तस्वीरें काफी है। कोई भी दल कभी देश से बड़ा नहीं हो सकता, कोई भी व्यक्ति देश की तस्वीर नहीं हो सकता, और अंध भक्तों का हुजूम वतन की शान कभी नहीं बढा सकता। व्यक्ति को खुदा मान जय-जयकार करने वालों का एलगार अंत में हाहाकार फिर फटकार, दुत्कार के बाद निपटा ही दिया जाता है।
         कल का तथाकथित मसीहा और मसीहा की मनमानी सेना उसकी शान की मजार बनाकर ही आखिर शांत होते हैं। यह इतिहास हम सबको बताता ही आया है,पर अंधभक्त को कुछ दिखता ही कहा है ? जो मुखिया ने बोला वह ब्रह्म वाक्य फिर उसे सही साबित करने के लिए किसी भी हद तक गिर जाने की हरकत एक खौफ़नाक बीमारी है जो लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने के लिए काफी है। अंधभक्ति देश के लिए इतनी हानिकारक है कि इसमें सच दबाया जाता है, और झूठ का बोलबाला बढ़ जाता है। दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के मंदिर पर हमला अंधभक्ति की निंदनीय पराकाष्ठा है, जिसे अपने नेता को सत्य साबित कर सर्वस्व निछावर करने वाले अंध भक्तों ने देश के दामन को वो दाग दिया जो 220 साल के अमेरिकी इतिहास में कभी नहीं लगा और कभी मिटेगा भी नही।  
                  खौफ का मंजर इतना खतरनाक था कि बंदूकधारी अंध भक्तों ने सत्ता के शीर्ष को कबजाने की राह पकड़ ली, व्यक्ति चाटुकारिता करते-करते कब मानसिक दिवालिया हो जाता है भनक भी नहीं लगती, सनक इतनी सवार हो जाती है कि अपने ही देश के खिलाफ खड़ा होने का दुस्साहस से भी अंधभक्त गुरेज नहीं रहता अंध भक्तों को......शुक्र है कि अबकी ट्रम्प सरकार अमेरिका में हार गई, खुदा ही जाने क्या कहर बरपता लोकतंत्र पर अगर ये अराजक ट्रम्प की जीत हो जाती।
         भक्तों की जमात के जज्बात से फैली अराजकता की दुनिया भर में थू थू हो रही है। कल के राष्ट्रीय नायक को फूटी आंख भी देखने को तैयार नहीं है वहां की आवाम, उनके अपने ही अधिकारी, अपने ही साथी, अपने ही दल के नेताओं ने एक-एक करके ना सिर्फ दूरी बना ली बल्कि आवाम की  आवाज में आवाज मिला सच को बुलन्दी दी है। इंग्लैंड,फ्रांस,कनाडा, और भारत में भी इस तस्वीर की निंदा की है निंदा होनी भी चाहिए, आलोचना होनी चाहिए।
क्या सबक दे गई अंध भक्तों की ये आंधी हमे भी  सोचना ही होगा। दुनिया के  सबसे पुराने लोकतंत्र से उठा ये अंधभक्ति का गुबार वहीं थम जाए, वहीं दम तोड़ दे तो बेहतर होगा। भारत जैसे महान देश को इस घटना से सबक लेना चाहिए कि सत्ता,सत्ताधीश की अंधभक्ति राष्ट्रीय शक्ति के लिए हानिकारक है। अंधभक्त समाज के लिए जहर, सत्ता के लिए कहर है। अंधभक्ति की जमात आफत है जिसके उफान में तबाही, बर्बादी,नाइंसाफी, तानाशाही, मारामारी,हकारत, नफरत और द्वेश पनपता है जो किसी भी देश के लिये किसी भी दृष्टि से हितकर  नहीं है।
संदीप मिश्र

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