• 05:42 pm
news-details
भारत

इसलिए है विरोध! कृषि क़ानूनों की खुली वकालत कर चुके हैं सुप्रीम कोर्ट कमेटी के सदस्य

कृषि कानूनों पर किसानों और सरकार से बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्यों पर कई संगठन सवाल उठा रहे हैं।

नए कृषि कानूनों पर चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को तीन कृषि कानूनों पर अमल करने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने चार सदस्यों की एक समिति का गठन कर उसे दोनों पक्षों से बातचीत कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। खास बात यह है कि इस कमेटी में शामिल लोग कृषि क़ानूनों की खुली वकालत कर चुके हैं। इनके नाम हैं भूपेंद्र सिंह मान, अशोक गुलाटी, प्रमोद जोशी और अनिल घनावत। आइए इनके बारे में यहां पर विस्तार से जानते हैं।

भूपेंद्र सिंह मान- गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में जन्मे, भूपेंद्र सिंह मान को किसानों के संघर्ष में उनके योगदान के लिए 1990 में राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। वह 1996 तक उच्च सदन के सदस्य बने रहे। वर्तमान में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष हैं।

पिछले दिसंबर में वह एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री से मिले थे और कुछ बदलावों के साथ तीनों कानून लागू करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “कृषि को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सुधारों की आवश्यकता है, लेकिन किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय भी किए जाने चाहिए, साथ ही विसंगतियों को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए।” आरंभ में भूपेंद्र सिंह मान का संगठन विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था।

प्रमोद कुमार जोशी– 1953 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे डॉ. प्रमोद कुमार जोशी कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं। जोशी ने पहले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद के निदेशक और नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान केंद्र के निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान में निदेशक (दक्षिण एशिया) का पद भी संभाला था। उन्हें 2012 में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।

हाल ही में एक लेख में उन्होंने कहा था कि “”कृषि कानूनों में कोई भी कमी भारतीय कृषि को उभरते वैश्विक अवसरों का दोहन करने के लिए विवश करेगी।” लेख में कानूनों की खूबियों का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि “प्रभावी संचार के अभाव में किसान गलत सूचना का शिकार होते हैं।

अशोक गुलाटी– एक प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री, गुलाटी इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) में कृषि के प्रोफेसर हैं। वह कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP), भारत सरकार (2011-14) के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। अशोक गुलाटी ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में तर्क दिया था कि खेत कानून सही दिशा में हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि विपक्ष को गुमराह किया गया है। कहा कि कानून “भारतीय कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे, और किसानों को लाभान्वित करेंगे।”

गुलाटी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सबसे कम उम्र के सदस्य और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और कर्नाटक राज्य योजना बोर्ड के सदस्य भी थे।

गुलाटी को उनके योगदान के लिए राष्ट्रपति से 2015 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे गए एक कॉलम में गुलाटी ने कहा था कि केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों और उनके फायदों के बारे में किसानों को सही ढंग से समझा पाने में विफल रही।

अनिल घनावत– अनिल घनावत वर्तमान में महाराष्ट्र स्थित संघ शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। इसकी स्थापना किसान नेता शरद जोशी ने की थी। संघटन केंद्र सरकार द्वारा घोषित खेत सुधारों के समर्थन में आने वाले पहले संगठनों में से एक था। यह निकाय किसानों के संघ के समूह में भी शामिल था, जिसने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से कृषि कानूनों के समर्थन के लिए मुलाकात की थी, जिसके खिलाफ हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे हैं।

घनावत के अनुसार “कानून एपीएमसी की शक्ति को उसकी चारदीवारों के भीतर कृषि व्यापार को विनियमित करने के लिए प्रतिबंधित करता है और वास्तविक मुक्त बाजारों को किसानों के लिए संचालित करने की अनुमति देता है।”

 

You can share this post!

Comments

Leave Comments