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पंजाब-हरियाणा

देश की आवाज केजरीवाल

    एक ओर वायदे जुमले, रोजगार, पकोड़े, महंगाई डायन से डार्लिंग हो गई और रुपये में गिरावट का दौर जारी है तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी के सपनों को संभालने की कारीगरी आम आदमी के सरकार की जारी है साहेब जब सत्ता में आए तो खुद को प्रधान सेवक घोषित करने के लिए लाल किले की प्राचीर पर चढ़ देश की तकदीर बदलने की घोषणा की। तकदीर ऐसी बदली की राम न करें ऐसी किसी की बदले जैसे भारत के गरीब, मजदूर, किसान, जवान की जबरन बदल दी गई। मन की बात से जन की सरकार चलाने वालों से देश में हाहाकार है, दिल्ली की सीमाओं पर ललकार है, घर-घर में दुतकार, गली-गली में एलगार है। महंगाई रानी सातवें आसमान पर चढ़ नाच रही है, रोजगार 45 साल में सबसे बुरे दौर में पहुंच खुद बेरोजगार बन आंसू टपका रहा है, पेट्रोल शतकवीर बन सबको आँखें दिखा रहा है व नौकरी दूरबीन से भी नहीं दिख रही है।

   बेरोजगारी और महंगाई के बीच में फंसा हिंदुस्तान कराह रहा है जिनकी सुनने के बजाय मन की बात जबरन सुनाई जा रही है। वादे और इरादे का फर्क साफ देखा जाने लगा है। वायदा एक के बदले दस सिर लाने का था, पुलवामा में चालीस शहीदों के सर चार सौ सिरों की आज भी मांग कर रहे हैं, दो करोड़ प्रति वर्ष नौकरी की उम्मीद में चौबीस करोड़ आंखें पथरा गई हैं और रुपया जो मनमोहन सिंह ने संभाला था आज धरातल से रसातल की ओर बेबाक दौड़ता जा रहा हैं। महंगाई को डायन कहने वालों ने अब उसे डार्लिंग बना दिया है गैस सिलेंडर पेट्रोल डीजल में इतनी आग है कि इन्हें देखते ही रुपए स्वाहा हो रहा है।

    दिल्ली की जमीन गवाह है दो राजनैतिक सितारों के आगाज की। एक गुजरात से चल देश का प्रधानमंत्री बना दूसरा अन्ना आंदोलन के मंथन से निकल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुआ। एक ही दिल्ली में लगभग एक काल में दो सूरज चमके साहेब ने जुमला की दीवार बना जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया, वही केजरीवाल सेवक बन जिम्मेदारी को चुनौती बना काम के नाम पर वोट मांग इतिहास रच दिया। मोदी सरकार अपने वायदों के जाल के जंजाल में आज उलझी खड़ी है वहीं केजरीवाल सरकार का एक एक काम बोल रहा है। बिजली का बिल जीरो, अस्पतालों का सुधार, शिक्षा की क्रांति, पानी की आपूर्ति, बसों में मुफ्त टिकट की सौगात दिल्ली वालों के चेहरे पर मुस्कान बन बरस रहे हैं। आम आदमी के लिए, आम आदमी द्वारा, आम आदमी की सरकार के दरबार की कमान केजरीवाल के हाथ में है। हिस्सेदारी, भागीदारी, जिम्मेदारी, पहरेदारी के चार मजबूत स्तंभ बना नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है आम आदमी की सरकार। केजरीवाल के जन हित के काम और खुशहाल दिल्ली वालों को पूरा देश देख रहा है। केंद्र की सरकार पर भी नज़र है बढ़ती महंगाई से पीड़ित देख रहे हैं, बुझते चूल्हे भूखे लोग देख रहे हैं, बेरोजगार जवानी देख रही है, लाचार मजदूर और परेशान किसान देख रहा है। ये दिल्ली की बड़ी सरकार का काम है। 

    दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री के चमकते अस्पताल में मुफ्त इलाज उपचार ऑपरेशन से खुश बीमार केजरीवाल को दुआएं दे रहे हैं, तीर्थ यात्रा में जाने वाले बुजुर्ग खुद के वोट को धन्य मान केजरीवाल को श्रवण कुमार कह रहे हैं, बसों में मुफ्त यात्रा करने वाली बहनों को केजरीवाल में अपना भाई दिखने लगा है, तो सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को केजरीवाल भाग्यविधाता नजर आते हैं। दिल्ली मॉडल अब देश की जरूरत बन गया है, कौन नहीं चाहता मुफ्त बिजली, पानी, बस की सुविधा? कौन नहीं चाहता मोहल्ला क्लीनिक और चमकते सरकारी अस्पताल में मुफ्त उपचार? कौन नहीं चाहता घर बैठे राशन की डिलीवरी? कौन नहीं चाहता सरकार द्वार पर आकर आपके काम करे? कौन नहीं चाहता वोट की कीमत? कौन नहीं चाहता कि देश में रामराज्य आए? यही वजह है कि केजरीवाल का रामराज्य देश भर की उम्मीद बन गया है। आज देश की आवाज केजरीवाल बन गए हैं। दिल्ली में दो सरकार एक राम का नाम लेकर चल रही है तो दूसरी राम के सपनो का राज बनाने का काम करके लगातार बढ़ रही है। केजरीवाल अपने काम के दम पर आज देश की उम्मीद है देश का भरोसा बन देश की पुकार बन जननायक बने खड़े हैं देश बदल रहा है सोच बदल रही काम बोलने लगा है।

 

संदीप मिश्र

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