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शून्य होती कांग्रेस सितारा बनती आप

राजनीति का नया रंग 


    देश के दिल दिल्ली से निकला राजनीति का नया रंग पूरे देश को लुभाने लगा है। इस चटक रंग की शोखी में ईमानदारी रची बसी है। आम आदमी का हक, उसकी हिफाजत, जिम्मेदारी, हिस्सेदारी, भागीदारी इस रंग का निखार है। विस्तार है पूरे देश में राजनीति के इस नए रंग का, यह काम का रंग है, भरोसे, उम्मीद का रंग है जनता आज जिसके संग है।
    अनजान चेहरों की अथक मेहनत, आवाम के लिए कुछ कर गुजरने की हसरत, बेहाल, बदहाल को संभालने सवारने की चाहत दिल्ली का मॉडल अब दुनिया की शोहरत है। दिल्ली की कुर्सी पर केजरीवाल का काबिज होना किसी चमत्कार से कम नहीं था 15 साल पुरानी शीला दीक्षित सरकार को कैसे शून्य पर ला खड़ा कर दिया ये राजनैतिक कौशल कोई 'आप' से सीखे। मुद्दों पर डटे रहना उसके लिए भिड़ जाना फिर सामने चाहे कोई भी हो यह धार ही राजनीति का नया किनारा है। कांग्रेस को शिफर करने में आप का कोई जवाब नहीं, दिल्ली से शुरू हुआ यह आप का जीरो कांग्रेस अभियान सूरत की तस्वीर बदल गया। हीरे की नगरी में नगीने की तरह चमका आप की मेहनत का पसीना। 27 कुर्सियों पर आम आदमी पार्टी की जीत को वहां के नेता सोने की थाली में लोहे की कील बता रहे हैं। सड़कों पर कीले ठोकने वाले सच कील हतोड़ा से ऊपर कहाँ उठ सकते हैं? हद तो ये हो गई कि अब वो कील की जुबान भी बोलने लगे। थाली पीटने, दिया जलाने, मन की बात करने वालों की जड़े हिलाने के लिए सूरत की यह जीत काफी है। पोस्टर तो यह भी छपने लगे कि सूरत तो शुरुआत है, अब लाल किले की बात है।
    कांग्रेस साफ आप का बढ़ता ग्राफ, आम आदमी पार्टी को देश का विकल्प बना रहा है। इसके पीछे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक कारीगरी, योजना, परिश्रम की पराकाष्ठा और दूर की सोच शुमार है। देश के चाणक्य कहे जाने वाले शाह के शहर में राजनीति की सूरत पर नया रंग खिला दिया अरविंद की जमीनी सियासत ने। भाषण, जुमला से तंग आ चुके देशवासी अब 'आप' की बड़ी भूमिका तैयार करने लगे हैं। राजनीति का नक्शा चटक नीले रंग की छाप छोड़ने लगा है। छोटे चुनावो में कहीं छोटी कहीं बड़ी तो कहीं धमाकेदार जीत मतदाताओं के आकर्षण का केंद्र बन रही है।
    दिल्ली मॉडल की सरकार में विकास है, शिक्षा है, स्वास्थ्य, सुविधा है सरकार के सहयोगी होने का एहसास है। दिल्ली वाले मुस्कुरा रहे हैं क्योंकि उनका मुख्यमंत्री उनके बच्चों की शिक्षा, घर की बिजली, पानी, दवाई, बस के सफर का खर्चा अपनी ज़िम्मेदारी जान चुका रहा है। हर दिल्ली वाला आम आदमी की सरकार की इन योजनाओं से प्रत्येक महीने का दस से पन्द्रह हज़ार बचा रहा है जो उसकी जिंदगी को नए आयाम दे रहे हैं, सरकार का भरोसा बढा रहे हैं। अब दिल्ली जैसी खुशहाली की राह पूरा देश तलाश रहा है। दूसरी बात एक ओर बड़े दल जहां वायदों को जुमला बता मन की बात करते फिरते हैं वही आम आदमी पार्टी का आम आदमी को किया वायदा पत्थर की लकीर साबित हो रहा है। लोकप्रियता का बढ़ता दायरा इस तथ्य की तस्दीक कर रहा है कि कश्मीर में जिला विकास परिषद एक सदस्य, पंजाब में बीस विधायक एक लोकसभा सांसद और 62 से ज्यादा पार्षद, हिमाचल प्रदेश में 36 ग्राम पंचायत सदस्य दिल्ली में 62 विधायक 50 से अधिक पार्षद तीन राज्य सभा सदस्य, उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक पार्षद, हरियाणा में एक नगर निगम सदस्य, गुजरात में 27 निगम पार्षद, महाराष्ट्र में 145 ग्राम पंचायत सदस्य, छत्तीसगढ़ एक पार्षद, तेलंगाना एक पार्षद और गोआ एक जिला पंचायत सदस्य।
    यह बदलते वक्त को बदलने की राजनीति का दौर है, जिसमें मतदाता अपने मन की चाहता है नेता के मन की गुलामी नहीं बर्दाश्त करता। हालांकि यह आम आदमी पार्टी की सधी सफल शुरुआत तो है पर लाल किले तक पहुंचने के जादुई आंकड़े में 271 की संख्या मौजूदा एक लोक सभा सांसद के साथ जोड़ना इतना आसान नहीं वो भी तब, जब सामने हिंदुत्व के नारे पर सवार प्रचंड बहुमत की सरकार राह रोके सामने खड़ी हो। कांग्रेस ने आपके सामने हथियार डाल दिया मालूम होता है और इन्हीं हथियार में धार लगा अब आम आदमी पार्टी को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक युद्ध लड़ने और जीतने की चुनौती है। देखते हैं कि राजनीति का नीला रंग केसरिया को कैसे गिराता है? और क्या उससे जीत भी पाता है? फ़िलहाल इतना तो है कि राजनीति का यह नया रंग तेजी से चढ़ बढ़ रहा है।
संदीप मिश्र

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