• 12:45 am
news-details
पंजाब-हरियाणा

85% फेफड़े संक्रमित, 60 औक्सीजन लेवल,डॉक्टर का जवाब, कुछ भी हो सकता है।फिर अपने एक ने कहा दुनिया को अलविदा , डबल मार के बावजूद हिम्मत के हथियार से जीती “जगजीत”ने जंग।

पलवल। कहते हैं कि हिम्मत-ए मर्दा,मदद-ए ख़ुदा। यह कहावत चरितार्थ करके दिखा दिया वरिष्ठ पत्रकार जगजीत शर्मा ने । पत्रकारीता के ढाई दशक में जगजीत शर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उत्तर भारत में जगजीत अपने नाम के अनुसार ही दबंग और निडर पत्रकार के रूप में पहचाने जाते हैं । चिंता और नकारात्मकता को ठोकर पर रखने वाले जगजीत को हाल ही में कोरोना  जैसी काल का ग्रास बनाने वाली बीमारी ने जकड़ लिया ।


 हस्पतालों में इलाज के लिये युद्ध स्तर पर मारामारी और घर पर रहकर दवाई बेअसर । घर पर पूरी रात ओकसीजन लेवल 60-65 तक आ गया।अगले दिन सुबह जैसे-तैसे ग्रह क्षेत्र के एक निजी हस्पताल में एंट्री मिली। फेफड़ों का स्कैन किया गया तो संक्रमण ने फेफड़ों को 85% तक जकड़ लिया था।डॉक्टर जो नी:संदेह भगवान का रूप होते हैं उनका परिजनों को साफ़ कहना था कि कुछ भी हो सकता है । 
ऐसी स्थिति में किसी के भी परिजनों के हाथ-पाँव फूलने लाज़मी हैं ।लेकिन कोरोना भी जान गया कि जंग के हर क्षेत्र के अजेय योद्धा जगजीत से है।हस्पताल में दाखिल होने के अगले दो दिन बाद डॉक्टर को सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे । 10 दिन तक हस्पताल में रहने के बाद जगजीत को ठीक होने का प्रमाण देकर घर भेज दिया गया और कहा गया कि कमजोरी है जो धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी ।


 घर पहुँचते ही जगजीत को पता चला कि उसका बेटा समान साथी पवन अत्री जो कि मानो उसकी परछाई थी, हस्पताल में कोरोना से जंग कर रहा है। जगजीत के लिये तो मानो कोढ़ में खाज हो गयी हो। वो अभी खुद इस बीमारी से उभर भी नहीं पाया कि इस ख़बर ने मानो उसे अंदर तक झकझोर कर दिया।क्यूँकि जगजीत को इल्म था कि उसका ये साथी जल्दी घबरा जाता है और इस बीमारी से ठीक होने के लिय घबराहट की कोई जगह नहीं है । जगजीत खुद कमजोरी के चलते चलने-फिरने की स्थिति में नहीं था, बस फ़ोन के द्वारा ही साथी के परिजनों से उसकी हालत की पल-पल की जानकारी ले रहा था। लेकिन शायद परमात्मा को जगजीत की और कड़ी परीक्षा लेनी थी। और वही हुआ जो अनजाना सा डर था । 19 मई को शाम क़रीब 8 बजे जगजीत को उसके लाड़ले के ज़िंदगी की जंग हारने की मनहूस ख़बर मिली। इस ख़बर ने मानो जगजीत को हिला कर रख दिया हो और जगजीत की जगह कोई भी होता तो उसका टूटना भी लाज़मी था। जगजीत का शरीर और दिलो-दिमाग़ इस झटके को झेलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था। दुनियाँ छोड़कर जाने वाला परिवार के सदस्य की तरह ही था तो जगजीत के परिवार में उनके बीवी-बच्चे भी इस सदमें में आ गये।

अब ऐसी स्थिति में जगजीत ने फिर हिम्मत का साहरा लिया और कठिन परिस्थिति में उभरने के लिए परिवार को तमाम कई प्रकार की कहानियाँ और क़िस्से सुनाकर हिम्मत बढ़ाई।कहते हैं कि समय हर ज़ख़्म पर मरहम लगा देता है । जगजीत की ज़िंदगी में भी ऐसा ही हो जाएगा । लेकिन जगजीत के लिये ही नहीं किसी के लिये भी किसी अपने का दुनियाँ से चले जाने का ग़म असहनीय होता है । लेकिन फिर भी हमें जगजीत शर्मा की हिम्मत  काफ़ी कुछ सीख देती है कि किन्ही विकट परिस्थितियों में भी सकारात्मक और हिम्मत के हथियार को नहीं छोड़ना है ।

You can share this post!

Comments

  • Sanjay Kumar Bhardawaj , 2021-05-23

    Bahut Bahut badhaiyan Sharma ji.

Leave Comments