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नयी सरकार का नया बजट कुछ इस तरह पेश हो रहा है , लाल ब्रीफकेस में नहीं इस बार मखमली लाल कपड़े में बजट आ रहा है।

तत्कालीन कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी 2019 को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल का अंतिरम बजट पेश करते हुए 5 लाख रुपये तक के टैक्सेबल इनकम को टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। इससे 5 लाख रुपये तक की कर योग्य सालाना आमदनी वाले लोग बिल्कुल टैक्स फ्री हो गए। हालांकि, तब इनकम टैक्स स्लैब्स में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था, लेकिन गोयल ने यह आश्वासन जरूर दिया था कि मोदी सरकार की वापसी हुई तो पूर्ण बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव संभव है। 
अंतरिम बजट में आश्वासन से बढ़ी उम्मीद 
गोयल ने कहा था कि टैक्स प्रपोजल जुलाई में आने वाले मुख्य बजट में आएंगे। उन्होंने कहा था, 'मैंने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। 

टैक्स रेट और लिमिट के प्रपोजल मेन बजट में तय होंगे। जनता का आशीर्वाद बना रहेगा तो जुलाई 2019 में मोदी सरकार यह बजट लेकर आएगी।' अब जब मोदी सरकार की केंद्र में वापस हो चुकी है और उसके दूसरे कार्यकाल का पहला बजट आज पेश होने जा रहा है तो पीयूष गोयल के आश्वासन पर उम्मीदें बढ़ गई हैं। खासकर वेतनभोगी वर्ग उम्मीद कर रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज के बजट में टैक्स स्लैब में टैक्स फ्री इनकम की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान करेंगी। 

वैसे भी पिछले पांच पूर्ण बजटों और इस वर्ष पेश अंतरिम बजट में भी मोदी सरकार ने करदाताओं को खुश करने की भरसक कोशिश की। आइए देखते हैं, वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2018-19 तक के बजट में सरकार ने इनकम टैकस के मोर्चे पर कौन-कौन से बड़े ऐलान किए थे। 

बजट 2014-15 
मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में ही टैक्सपेयर्स को खुश करने की कोशिश की। इस बजट में इनकम टैक्स में छूट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई थी। वहीं, 60 वर्ष से ज्यादा और 80 वर्ष से कम उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स छूट की सीमा 3 लाख कर दी गई थी। इसके साथ ही, इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80C के तहत निवेश पर टैक्स छूट की सीमा भी तब 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई थी। साथ ही, मध्य वर्ग के लोगों को सेक्शन 24 के तहत हाउसिंग लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई थी। 

बजट 2015-16 
अपने दूसरे बजट में मोदी सरकार ने पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। हालांकि, कुछ ऐसे ऐलान किए जिनसे सैलरीड क्लास को निवेश पर ज्यादा टैक्स बचाने में मदद मिली। 2015-16 के बजट में सरकार ने नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए सेक्शन 80CCD(1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर अतिरिक्त 50 हजार रुपये की टैक्स छूट की घोषणा की गई थी। यह सेक्शन 80C के तहत मिल रही 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट से अलग थी। यानी, अब लोगों को कुल 2 लाख रुपये के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिल रहा है। 

सैलरीड क्लास के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस लिमिट को दोगुना कर 800 रुपये से 1600 रुपये प्रति माह कर दिया गया। एक और बड़ा बदलाव हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट बढ़ाकर किया गया। इसके तहत, इंडिविजुअल्स के लिए यह सीमा 15 हजार रु. से बढ़ाकर 25 हजार रु. कर दी गई जबकि सीनियर सिटिजंस के लिए यह 20 हजार रु. से बढ़ाकर 30 हजार रु. कर दी गई। 

उधर, सुकन्या समृद्धि योजना को भी पीपीएफ के समान ही टैक्स छूट के दायरे में ला दिया गया। बजट घोषणा से पहले सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश की रकम पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिल रही थी, लेकिन इससे हुई आमदनी और निकासी पर टैक्स का प्रावधान था। उस बजट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स के लिए सरचार्ज 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया था। हालांकि, तत्कालीन वित्त मंत्री ने वेल्थ टैक्स खत्म करने का ऐलान किया था। 

2019 के अंतरिम बजट की घोषणाओं के बाद मौजूदा टैक्स स्लैब्स इस प्रकार हैं... 

मौजूदा टैक्स स्लैब्स।


बजट 2016-17 
उस बजट में हाइ नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) यानी 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई वाले इंडिविजुअल्स के लिए सरचार्ज में फिर से 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई और यह 15 प्रतिशत पर पहुंच गया था। साथ ही, किराए के मकान में रह रहे ऐसे लोगों को जिनकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) पार्ट नहीं होता है, उन्हें सेक्शन 80GG के तहत किराए की रकम पर टैक्स छूट की सीमा 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई थी। 

वहीं, 5 लाख रुपये से कम की सालाना आमदनी वाले छोटे और सीमांत करदाताओं को इनकम टैक्स पर 2 हजार रुपये 5 हजार रुपये तक की राहत दी गई। उधर, प्रॉपर्टी खरीदने वालों को सेक्शन 80EE के तहत कुछ शर्तों के साथ 50 हजार रुपये के अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन की सुविधा दी गई। 

बजट 2017-18 
इस बजट में 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक के ऐनुअल इनकम पर टैक्स की दर 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी थी। इससे टैक्सपेयरों की जेब में 12,500 रुपये ज्यादा बचने लगे। उधर, 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच सालाना कमाई कर रहे लोगों के लिए टैक्स पर 10 प्रतिशत सरचार्ज का नया प्रावधान कर दिया गया। 

बजट 2018-19 
पिछले साल के बजट में मोदी सरकार ने सैलरीड क्लास और पेंशनभोगियों के लिए 40 हजार रु. के स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी का ऐलान किया, लेकिन बदले में मेडिकल रीइंबर्समेंट्स और ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म कर दी। इससे टैक्सपेयरों को 5,800 रुपये की अतिरिक्त टैक्स बचत हो रही है। 

वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में टैक्स पर 1 प्रतिशत सेस बढ़ा दिया गया। इस तर पिछले वर्ष से सेस 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत हो गया। इसी बजट में एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये से ज्यादा कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 10 प्रतिशत का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स लागू कर दिया गया। 

अंतरिम बजट 2019-20 
मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल के आखिर में इस वर्ष 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट पेश किया था। उसमें 5 लाख रुपये तक की सालाना टैक्सेबल इनकम वाले करदाताओं को टैक्स मुक्त करने का ऐलान किया गया था। यानी, जिनकी सालाना करयोग्य आय 5 लाख रुपये तक है, उन्हें टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि, जिनकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख से ज्यादा है, वे इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे क्योंकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे करीब 3 करोड़ करदाताओं को करों में 18,500 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। यह लाभ इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 87A के तहत दिया गया है। 

इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि 80C से लेकर 80U के तहत आने वाले सभी डिडक्शन के बाद भी अगर आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक रहती है तो आपको टैक्स देना होगा अन्यथा कोई टैक्स नहीं देना होगा। बजट घोषणा में कहा गया था कि जिन लोगों की कुल आमदनी 6.50 लाख रुपये तक है, उन्‍हें भी किसी प्रकार के इनकम टैक्स के भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते वे 80C के तहत सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर लें।

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