• 06:48 am
news-details
बिहार

तो इसलिए कहा था, अंत भला तो सब भला!

जबरदस्त उठा-पटक और तमाम राजनैतिक दांव-पेच के बाद आखिरकार बिहार चुनाव सम्पन्न हुआ। मीडिया रिपोर्ट की माने तो नितिश बाबू एक बार फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार की कमान थामने जा रहे है। 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व बिहार में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली भाजपा फिलहाल जीत के रंग में सराबोर है। दूसरी ओर जिन नितिश कुमार की मुख्यमंत्री के रूप में ताज-पोशी होनी है उन्होंने एका-एक चुप्पी साध ली है। ऐसी ही चुप्पी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया तेजस्वी यादव की ओर से भी महसूस की जा रही है । 

बिहार की 70 सीटों पर शर्मनाक प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस के बडे़ नेता दिर्गविजय सिंह ने नितिश बाबू को केन्द्र की राजनीति में आंमत्रित कर बडा़ दांव चल दिया है। दिर्गविजय सिंह ने भाजपा की तुलना अमर बेल से करते हुए नितिश बाबू को नसीहत तक दे डाली है और कहा है की भाजपा जिस पेड़ पर लिपट जाती है वो पेड सुख जाता है।

 राजनीति के माहिर खिलाड़ी नितिश कुमार अपनी उम्र के 70वे वर्ष के पडा़व पर है, उन्होंने पहले ही यह घोषणा कर दी थी की यह उनका अंतिम चुनाव है। ऐसा लगता नहीं की सारी उम्र बजे भाई की भूमिका में दंबगई से राज करने वाले नितिश कुमार अपने अंतिम पडा़व में बिहार में छोटे भाई की भूमिका निभा पाएगे या निभाना चाहेंगे! वो भी तब जब वह यह अच्छी तरह जानते हो की बिहार की राजनीति में उनका कद कम करने के लिए, उन्हीं की सहयोगी पार्टी ने क्या-क्या गुल खिलाये हैं और किस प्रकार उनकी पीठ में छुरा भौकने का काम किया है! 

नितिश बाबू की राजनीति पर पैंनी नज़र रखने वाले यह अच्छी तरह जानते होगें की नितिश बाबू की चुप्पी कभी भी कोई नया गुल खिला सकती है। अगर किसी के दिमाग में यह गलतफहमी चल रही हो की 43 सीटों ने बिहार में नितिश कुमार को कमजोर कर दिया है या नितिश बाबू  को मुख्यमंत्री बना कर भाजपा नितिश कुमार पर कोई एहसान करने जा रही है तो उन्हें अपने दिमाग से यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए। 

भाजपा को झक मार कर नितिश कुमार को मुख्यमंत्री बनाना ही पडे़गा। क्योकि बिहार की जनता ने जनमत ही इस तरह का दिया है। भाजपा नेतृत्व यह बात अच्छी तरह जानता है की नितिश कुमार से मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी भी तरह की इफ एन बट की गई तो नितिश कुमार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद सौपने में एक क्षण की भी देरी नहीं करेंगे! क्योकि जेडीयू की भविष्य की राजनीति के लिए भाजपा का मुख्यमंत्री उन्हें किसी भी प्रकार स्वीकार्य नहीं होगा। 

 यहीं कारण है की नितिश बाबू ने चुप्पी साध रखी है।  भाजपा ने अपना वादा पूरा नहीं किया तो कांग्रेस के दिए गये आँफर को स्वीकार करने में भी नितिश कुमार परहेज नहीं करेंगे वो केन्द्र की राजनीति का रूख भी कर सकते हैं ।  क्योंकि वह यह अच्छी तरह जानते है की उनकी बराबरी का कद देश में फिलहाल किसी ओर नेता के पास नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व के अभाव में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। तीसरे मोर्चे के नेतृत्व के लिए पूरे देश में फिलहाल कोई चेहरा ही नही है। 

मुलायम सिंह देश के राजनैतिक पटल से गायब हो चुके हैं, मायावती अपने राजनैतिक कैरियर की ढ़लान पर है, लालू यादव जैल में है, ओमप्रकाश चौटाला की राजनीति की पारी भी लगभग खत्म हो चुकी है। अकाली प्रकाश सिंह बादल भी हाशिए पर है। चन्द्र बाबू नायडू का भी देश की राजनीति में अब वो कद नहीं रहा है,जयललिता अब हमारे बीच नहीं रही हैं । देश में नया नेतृत्व पैर पसार रहा है, जो पूरी तरह दिशाहीन है। ऐसे में नितिश कुमार के रूप में सिर्फ एक चेहरा बचता है जो देश के सम्पूर्ण विपक्ष को इकट्ठा कर उसका नेतृत्व कर सकता है और कांग्रेस की मदद से अजेय लग रही भाजपा को चुनौती दे सकता है। 

 यह बात भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पार्टीयां अच्छी तरह समझती हैं । भाजपा के लिए भी अच्छा यही है की लंबे समय तक देश पर राज करने के लिए विपक्ष को एक-जुट ना होने दिया जाए और चुपचाप सरेड़र करते हुए बिहार में बडा़ भाई होते हुए भी, नो इफ नो बट करते हुए नितिश बाबू को ही बड़ा भाई मानते हुए मुख्यमंत्री पद सौप कर बिहार तक ही सीमित कर दिया जाएं। यह बात नितिश बाबू अच्छी तरह समझते हैं, तभी तो उन्होंने कहा था की अंत भला तो सब भला!

You can share this post!

Comments

  • Luneta HYUNDAI ATOS PRIME MX 2020 , 2020-11-16

    5 Stars https://vanzari-parbrize.ro/parbrize/parbriz-iveco-daily_tourys_bus-2015-71480.html

  • Luneta HYUNDAI ATOS PRIME MX 2020 , 2020-11-16

    5 Stars https://vanzari-parbrize.ro/parbrize/parbriz-iveco-daily_tourys_bus-2015-71480.html

Leave Comments