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कोविड 19 महामारी के नाम पर मरीज के परिजनों से अवैध रूप से रकम वसूलने वाले अस्पताल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज

पलवल, 21 मई (सुन्दर कुंडु) : देशभर में कोरोना महामारी ने विकराल रूप धारण कर लिया है लेकिन जहां इस भयंकर महामारी में एक दूसरे की मदद के लिए आगे बढ़कर इस भयंकर महामारी को मात देने के लिए आगे आना चाहिए वहीं कुछ लोग पीड़ित कोरोना संक्रमितों और उनके परिजनों से इलाज के नाम पर उनके जेब पर डाका डालने का काम कर रहे है। इसी का ताजा मामला उस समय सामने आया जब पलवल बार एसोसिएशन के एक वकील की शिकायत पर पुलिस ने एक निजी अस्पताल के संचालक और डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

पलवल जिला अदालत के अधिवक्ता रवि रावत ने कैम्प थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 1 मई को उनकी 67 वर्षीय माताजी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी जिसे वो करीब 2 बजे पलवल बस स्टैंड के करीब स्थित गुरुनानक हॉस्पिटल लेकर गए। वहां आपातकालीन विभाग में बैठे एक आदमी को मैंने पूरी समस्या के बारे में बताया तो उक्त युवक ने कहा कि अस्पताल के मालिक से बात करने के बाद इलाज शुरू किया जाएगा। करीब एक घण्टे बाद मेरी माताजी का स्वास्थ्य खराब होने लगा तो मैंने उस व्यक्ति से इलाज करने को कहा तो उक्त युवक ने मुझसे कहा कि मेडिक्लेम नही चलेगा और रोजाना साठ हजार रुपये जमा करने होंगे व कोई बिल या रशीद नही मिलेगी। जब मेरी माता की तबियत ज्यादा खराब होने लगी तो मैंने उससे बेड पर लिटाने के लिए कहा तो उसने बेसमेंट से फ़ाइल बनवाने के लिए कहा जब में फ़ाइल बनवाने के लिए गया तो वहां बैठे युवक ने 30000 रुपये एडवांस जमा करने और 10 हजार रुपये दवाइयों के लिए मांगे।

आपातकालीन विभाग में बैठे व्यक्ति ने फ़ाइल बनवाने के बाद मेरे से बदतमीजी से पेश आते हुए कहा कि इलाज हमारी शर्तों के हिसाब से होगा अन्यथा अपने मरीज कहीं भी ले जाओ। जब मेरी माताजी की तबियत बिल्कुल खराब होने लगी तो मैंने पूछा कि डॉक्टर साहब कितनी देर में आएंगे तो दो व्यक्तियों ने मुझसे पूछा कि पैसे कितने जमा किये है तो मैंने उन्हें बताया कि 40 हजार तो उन्होंने कहा कि पहले 30 हजार और जमा करने होंगे तब इलाज शुरू किया जाएगा। जब मैंने उन दोनों के नाम पता किये तो उनमें एक अस्पताल का मालिक अनूप और दूसरा उसका पुत्र तेजेन्द्र था। उसके बाद हम किसी और अस्पताल में ले जाने के लिए इंतजाम करने लगे और हमारी बात चंडीगढ़ एक अस्पताल में हो गयी तो हमने अनूप कुमार और तेजेन्द्र से एम्बुलेंस के बारे में बात की तो उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को बुलाया और मुझसे चंडीगढ़ ले जाने के लिए ढाई लाख रुपये मांगे काफी मिन्नत करने के बाद 1 लाख 10 हजार रुपये में तय हो गए तब जाकर उन्हें एम्बुलेंस मिली जब वो अपनी माता जी को रात एक बजे बिल्कुल खस्ता हालात में चंडीगढ़ लेकर गए। और वहां जाकर उपचार के लिए अपनी माता जी को एडमिट कराया। पुलिस जांच अधिकारी के अनुसार पुलिस ने शिकायतकर्ता अधिवक्ता रवि रावत के ब्यानों के आधार पर अस्पताल संचालक अनूप कुमार उसके पुत्र तेजेन्द्र और एक अन्य नेत्रपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

वहीं जिला बार एसोसिएशन पलवल के प्रधान दीपक चौहान ने बताया कि निजी अस्पताल संचालकों द्वारा कोविड 19 बीमारी का भय दिखाकर लोगों की जेबों पर डाका डाला जा रहा है। ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ प्रशाशन से लेकर सरकार तक शिकायत दे दी गयी है और जल्द ही ऐसे लालची लोग बेनकाब होंगे साथ ही उन्होंने बताया कि ऐसे अस्पताल मालिकों की पैरवी जिला अदालत का कोई वकील नही करेगा।

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