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*खोरी गाव के एक लाख निवासी लगातार बुलडोज़र के डर में रह रहे है*

 

*दिल्ली एनसीआर के मेहनतकश मजदूरों को कूड़े का ढेर समझना बंद करो*

*मजदूरों के घरों को तोड़ना बंद करो , निवास का अधिकार सुनिश्चित करो*

*सारे गिरफ्तार आंदोलनकारियों को रिहा करो*

*भाजपा शासित हरयाणा सरकार इसके लिए ज़िम्मेदार है*
9 जून आइसा और ऐक्टू के साथियो ने खोरी गाँव का दौरा किया, जहाँ खोरी गाँव के मजदूरों के घरों पर खट्टर सरकार लगातार बुलडोज़र चलाने का काम कर रही है । खोरी गाँव यू पी, बिहार , पश्चिम बंगाल और बाकी प्रदेशो के गरीब मजदूरों के द्वारा बसाई गयी बस्ती है । ज्यादातर लोग खोरी गाँव मे 30 - 40 साल पहले से रह रहे है । उन्होंने अपनी ज़मीन वहा के स्थानीय डीलर्स से ली थी । दिल्ली एनसीआर में काम करने वाले बहुत से मजदूर खोरी गाँव के स्थानीय निवासी है जिनके घरों पर अब खतरा मंडरा रहा है ।

सर्वोच्च न्यायालय के 7 जून वाले आदेश के बाद खोरी गाँव के घरों के टूट जाने का दुःस्वप्न रोज़ाना ही निवासियों के ऊपर बना हुआ है ।
जंगल बचाने के नाम पर 1 लाख निवासियों के जीवन को बर्बाद करने का मसौदा तैयार किया जा रहा है ।
एक तरफ मजदूरों के घरों पर तलवार लटक रही है दूसरी तरफ बड़ी व्यापारिक इमारतों, होटलो ,बिल्डिगों को खट्टर सरकार का बडोज़र छूने की मंशा में भी नही है , जिसमे वेदांता की बिल्डिंग भी एक है ।
250-300 घरों को पहले ही अप्रैल मई के महीनों में तोड़ा जा चुका है जिसमे करीबन 1500 लोग रहते थे । बहुत से निवासी उन्ही मलबों में इसी भीषण गर्मी में रह रहे है उनके पास कहीं और जाने का कोई विकल्प नही है । वो लोग दिल्ली या फरीदाबाद के मंहगे रूम नही ले सकते । उन लोगो को भीषण गर्मी में तपने के लिए छोड़ दिया गया है मगर किसी को इससे क्या ही फर्क पड़ता है ।

ये खट्टर सरकार की ज़िम्मेदारी है वो एक लाख से ज्यादा खोरी गाँव के आम मजदूर निवासियों को उनके रहने की जगह सुनिश्चित कराए । मनोहर लाल खट्टर ने इस विध्वंस को रोकने का कोई प्रयास नही किया । बल्कि वो ये कह रहे है कि सिर्फ उन लोगो को बसाने का काम किया जाएगा जिनके पास हरयाणा सरकार से प्राप्त कागज़ उपलब्ध है । लेकिन हम जानते है कि शहरी गरीबो के साथ क्या होता है जब उन्हें एक विस्थापन के बाद दूसरा विस्थापन झेलना पड़ता है ।

बात ये है कि ना तो महामारी ना बेरोज़गारी , ना आर्थिक तनाव ना देह को जलाता सूर्य उतना ज़िम्मेदार नही है उन आम मज़दूरों के विस्थापन के लिए जितना सरकार द्वारा पानी बिजली को बंद कर देना और बुलडोजरों की तैयारी शुरू कर देना । ये स्पष्ट करता है कि सरकार की मंशा क्या है शहर के आम गरीब मजदूरों के बारे में ।

पूरे देश ने देखा कि किस तरह कोविड महामारी में आम मज़दूरों को पहली तालाबंदी में भयानक आपदा झेलनी पड़ी । जो लोग शहर में रुक गए अब उन्हें उनके घरों से उजाड़ा जा रहा है । सभी प्रगतिशील लोकतांत्रिक तबको को आज इस मुहिम से जुड़ना चाहिए और खोरी गाँव पर चल रहे विध्वंस को रोकने के लिए एकजूट होकर आवाज़ उठानी चाहिए । 

हरयाणा सरकार पर दबाव बनाना ही होगा कि वो अध्यादेश लाके खोरी गाँव के लोगो के निवास की जगह को सुनिश्चित कराए । कोई भी जोर जबरदस्ती से किया गया विध्वंस गैरकानूनी माना जाना चाहिए ।

जिन शहरों को गरीब लोगों ने बनाया और उसे आगे बढ़ाया है उनका उन शहरों पर पूरा अधिकार है । उनके अधिकारों का हनन हमे एक जुट होक पूरी ताकत से रोकना पड़ेगा ।
AICCTU-AISA

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