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पंजाब-हरियाणा

डर अपराधी से नहीं साहेब कैप्टन से लगता है

महाराजा नही महराज पसन्द है

  लुधियाना से लखनऊ कारोबार समेटने को तैयार उद्योगपतियों का दर्द इस एक पंक्ति में सिमट गया है। कतार बना पचास से अधिक उद्योगपति लखनऊ दरबार में योगी महराज से मिल गुहार लगाई कि लुधियाना अब और नहीं। कैप्टन की उद्योग विरोधी नीतियों के खौफ से पंजाब छोड़ पलायन को मजबूर व्यापारियों को मालूम है कि अपराध का ग्राफ उत्तर प्रदेश में पंजाब से कई गुना आगे है फिर भी कैप्टन का कहर उन्हें ज्यादा खौफनाक क्यों लगता है? 


     यह सवाल युवाओं के रोजगार, नौजवानों के भविष्य और पंजाब की आर्थिक सेहत से जुड़ा है क्यों उद्योगपतियों को शांति प्रदेश छोड़ दूसरा ठिकाना तलाश ना मजबूरी हो गई है? उद्योगों को ताले लगा शहर, व्यापार, कारोबार, रोजगार, घर, परिवार को छोड़ नई दुनिया बसाने लुधियाना से निकल पड़े हैं। कैप्टन सरकार ने उद्योगपतियों को इतना मजबूर क्यों कर दिया कि सब कुछ छोड़ उद्योगपति नई मंजिल की ओर उड़ान भरने को बेताब है? पंजाब को इस सवाल का जवाब तलाशना होगा, कैप्टन सरकार को उद्योगपतियों का पलायन रोकना होगा, प्रदेशवासियों को पूछना होगा जब उद्योग ही नहीं बचेंगे तो बेटे बेटियों को रोजगार कैसे मिलेगा? रोजी-रोटी आखिर कैसे चलेगी? उनका चूल्हा कैसे जलेगा?


     लुधियाना के उद्योगपतियों का लखनऊ से ठिकाना मांगना यह साबित करता है कि महाराजा के राज में सुरक्षा, सुविधा, सम्मान, साधन के साथ-साथ व्यापार कारोबार पर भी कुठाराघात हुआ है। उद्यमियों के अलविदा कहने से पंजाब से क्या-क्या खुद ब खुद विदा हो जाएगा यह सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।


     खाली खजाने वाले पंजाब में उद्योग पर पड़ने वाला ताला कैप्टन की दी हुई इस अनचाही सौगात से पंजाब को उबरने में बहुत वक्त लगेगा। पंजाब की आर्थिक राजधानी लुधियाना से लखनऊ की ओर दौड़ते उद्योगपतियों का स्वागत करने को बेताब है योगी सरकार। महाराजा की गोद से उतर महाराज की उंगली थामने को बेताब उद्योग घरानों का यह दर्द भरा तराना पंजाब को आने वाले समय में बहुत रुलाने वाला साबित होगा। उत्तर प्रदेश में लुधियाना के उद्योग को बचाने के लिए लुभावने वायदों की झड़ी लगा दी है। 24 घंटे अनकट बिजली, सिंगल विंडो बिना कतार, बिना इंतजार, एक बार में सारे सम्भव अधिकार सस्ते मजदूर की बात बिना समय गवाएं देने की ततपरता महाराजा के हाथ से उद्योगों को छीनने की महराज की आतुरता उनके नेतृत्व कुशलता को दर्शाती है।


      पंजाब के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी चुनावी रणभेरी बजेगी चुनावी दौर में रथ पर सवार महाराज ताल ठोक कर कांग्रेस को घेर ललकारेंगे, चीख चीख कर बोलेंगे लुधियाना संभाल नहीं पाए लखनऊ जीतने का ख्वाब देख रहे हैं। कैप्टन साहब की ये गलती प्रियंका गांधी की मेहनत पर पानी फेरने के लिए काफी होगी। कांग्रेस के लिए अमेठी पहले ही इतिहास, अतीत का हिस्सा बन चुका है ऐसे में लुधियाना का लखनऊ देख मुस्कुराना, कांग्रेस की आँखों का आंसू बन जाएगा। पंजाब को मजबूरन छोड़ अपराध के ऊंचे ग्राफ वाले प्रदेश की सीमा से सुरक्षा माँगना मजबूर उद्योगपतियों की मजबूरी का बयां करने के लिए काफी है। उद्योग घरानो की ये अनकही मज़बूरी समझी जा सकती है कि उन्हें कैप्टन की नीतियों से कितना डर लगता है।


     पंजाब उद्योगों के पलायन से सूना हो जाएगा, ऐसे सूने पंजाब की कल्पना कभी किसी ने भी सपने में भी नहीं की होगी। कैप्टन साहब जागो, पंजाब के दर्द को देखो, पंजाब के लिए ना सही अपनी पार्टी के लिए ही, अपने एमएलए, मंत्री, अपनी सरकार की इज्जत के लिए ही सही इस पलायन को रोको। आपके सोते रहने का खामियाजा पीढ़ियां भुगतेंगी, अगर उद्योगों ने लुधियाना से मुँह मोड़ लखनऊ में मन लगा लिया तो पंजाब आपको कभी माफ भी कर पायेगा क्या? महाराजा जी वक़्त है उद्योगों को बचा लो, उद्योगपतियों को रोक लो, आपको आपके चुनाव का वास्ता।

पण्डित संदीप

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