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पंजाब-हरियाणा

पंजाब से मॉफी कौन मांगेगां

    एक शख्स दूर से बैठा सिद्धू और कप्तान के डायलॉग लिख बुलवा रहा है। कभी सिद्धू को मीडिया की सनसनी बना घर-घर दर-दर भटका रहा है, तो कभी कैप्टन की शर्त भरी मुलाकात को उछाल रहा है।कैप्टन और सिद्धू दोनों की ही डोर के छोर उस रणनीतिकार के हाथों में कैद मालूम होते हैं। चतुर रणनीतिकार कभी सिद्धू से ठोको ताली बुलवा ढोल की तान छेड़ आगे बढ़ा रहा है तो कभी कैप्टन से मांगो माफी मुलाकात करो की बात करवाता है। उस शख्स के लिए पंजाब खेल का मैदान है और दोनों धड़े खिलाड़ी, जनता तमाशा देखने वाली और निर्णायक दस नंबरी घर। पंजाब में पंजाब से बड़ा न कैप्टन हो सकता है और ना ही नए प्रधान जी। कुर्सी कुर्सी, माफी माफी का यह खेल सच मायने में पंजाब से खिलवाड़ है। माफी मांगेगा तो दर्शन पाएगा यह महाराजा का अहंकार है जो उनके सिर चढ़कर बोल रहा है। इस अहंकार से पंजाब का, पंजाबियत का इंसानियत का पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है। दोषी कौन है? प्रधान जी ने प्रधान बनने से पहले किसे कटघरे में खड़ा कर किसकी कुर्सी खिसका दी। प्रधान जी जब कैप्टन दोषी है तो कैप्टन सा माफी मांग क्या पंजाब के जख्म भर जाएंगे? वो शख्स जो पर्दे के पीछे से खेल खिला रहा है वो पंजाब का होता तो पंजाब को "माफी माफी" का मैदान बना पंजाब की अस्मिता से खेलने का साहस नहीं करता। पंजाब के युवाओं के रोजगार से खिलवाड़ करने के बाद माफी माफी का नया खेल खेल पंजाब की आँख में धूल झोंक रहे हैं। खुली आँखों से आपका यह तमाशा पूरा पंजाब देख रहा है। आग से खेलने का अंजाम नहीं जानते हो आप तो जल्द ही जान लोगे।

    जब से दिल्ली दरबार से आशीर्वाद ले प्रधान जी चुपचाप निकल, पंजाब की जमीन पर पधारे हैं तब से "सिद्धू ही सर्वश्रेष्ठ" की आत्ममुग्धता में अपने ही मुख्यमंत्री की बांह मरोड़ने में लगे हैं। कांग्रेस कांग्रेस से लड़ रही है, कांग्रेस कांग्रेस से झगड़ रही है। कल तक कैप्टन के दरबारी आज सिद्धू से यारी पाल अपने अपने धंधों को बचाने की जुगत भिड़ाने जुट गए हैं। जो माफिया, भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर सिद्धू के निशाने पर थे वो अब सिद्धू के सिरहाने बैठे मोतीचूर के लड्डू तोड़ रहे हैं। इन चेहरों की असलियत सिद्धू प्रधानी की कुर्सी कब्जाने के बाद भले ही भूल गए हो, पर पंजाब को याद है एक एक दागदार चेहरे, ईमानदार पंजाब को कैसे बर्बाद कर रहे हैं। प्रधान के साथ खड़ा हो कोई पवित्र हो जाएगा अगर सिद्धू इस सोच के साथ बढ़ रहे हैं तो यह उनकी पहली हार है और यह हार इतनी करारी होगी कि जीत की उम्मीद चकनाचूर कर देगी। सियासत की पारी उधार की स्क्रिप्ट के दम पर खेला खेल मीडिया में मुँह दिखाई तो कर लोगे... पर पंजाब को क्या मुँह दिखाओगे? यह भी सोच विचार लो आपके दागे सवाल पंजाब की फिजा में आज भी जस के तस तैर रहे हैं।

      ताजपोशी अभी शेष है, जंग जारी है, सबसे यारी है, यह कैसी पंजाब जीतने की तैयारी है। जिसमें अपने ही सवालों के जवाब गुम है। पंजाब कांग्रेस का चेहरा बदला है पर चरित्र कहाँ बदला? जिनको बाहें फैला प्रधान जी गले लगा प्रसन्न है, उनके गोल-गोल कारनामों की पहले वो पोल खोलते रहे हैं। जिन्हें माफिया बता दनादन सवालों की बौछार करते रहे बदलते वक्त के साथ बदल कर आए प्रधान जी उनके दर पर बाहों में बाहें डाल झप्पियां ले रहे हैं। आपकी कुर्सी, आपकी माफी, आपके सवालों के बेदम हो जाने के बाद पंजाब जाग गया है। पंजाब अब न झांसे में आएगा ना खामोश तमाशा देखेगा।

    कांग्रेस की स्क्रिप्ट लिखने वाली कलम को सोचना होगा करंट टीवी पर नहीं लगने से कुछ नहीं होगा। घाव पंजाब के दिल में है। चेहरा बदल जो चिंगारी बनाने की कवायद है उसके साथ खड़े चेहरे उसे धुआं धुआं करने के लिए काफी हैं। नए प्रधान को घेरने के लिए उनके ही सवालों के तीर उनके पीछे पड़े हैं, अब तो सवाल भी खुद हैं और जवाब भी जनाब को खुद ही देना है। तो न्याय होगा कैसे पंजाब सब समझ गया है। लिखी लिखाई स्क्रिप्ट को आगे बढ़ाते हुए, जब आप दर-दर मत्था टेक, बिना परहेज, बेईमान, ईमानदार, माफिया, विरोधी सबके हाथ पकड़ने को बेताब हो तो आज नहीं तो कल आप कैप्टन साहब से भी माफी मांगने को तैयार हो ही जाओगे इतना ही जोड़ना होगा की "पंजाब की भलाई के लिए सिर झुका दिया" कहकर ताली भी ठोक सकते हो। इस स्क्रिप्ट का अगला पन्ना कुछ इसी मजमून के साथ सामने आ सकता है। आप उधार की कलम से भाषण दे मीडिया के परदे पर छा सकते हैं, पर कांग्रेस ने तो जो पंजाब के साथ नाइंसाफी की है उसका हल नहीं तलाश सकेंगे। समस्या के समाधान सच की तलाश में आपको जनता के बीच आना ही होगा, जब आओगे तो पाओगे लोग पूछेंगे यह जो दांई ओर खड़े हैं क्या करते हैं? और यह जो बाई ओर खड़े हैं उनका क्या कारोबार है? आपका हर कदम, हर तस्वीर, हर चाल, हर शब्द, अब मायने रखता है। इसके मायने जनता पूछेगी और विपक्ष जोर-शोर से उठाएगा भी रस्म अदायगी में झूमने, घूमने, उड़ने का वक्त है। जब पांव जमीन पर होंगे तो आपके ही सवाल मुँह फैलाए आपसे ही जवाब मांगेगे।

 

 

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