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पंजाब-हरियाणा

किसानों के गुस्से के आगे सिवल-पुलिस प्रशासन की हुई बस, व्यापारी डरा।

किसानों ने नहीं की रेलवे एक्ट, धारा 144 और कोविड -19 कानूनों की परवाह।

रेलवे पुलिस ने इकट्ठा  करना शुरू किया रेलवे ट्रैक पर बैठकर धरनाकारी किसानों का आंकड़ा।
बरनाला, अखिलेश बंसल/करन अवतार।
केंद्र सरकार की ओर से लागू किये गए कृषि बिल-2020 के विरोध में किसान रेलवे एक्ट, धारा 144 और कोविड -19 कानूनों की परवाह किए बिना रेलवे लाइन पर आ बैठे हैं। किसानों के गुस्से को देखकर सिवल और पुलिस प्रशासन की भी बस हो गई। इधर किसी किस्म के कलह से डरते व्यापारी वर्ग ने शुक्रवार को अपना व्यापार पूरी तरह बंद रखा। उधर रेलवे पुलिस ने हाई कमान के दिशा निर्देश मिलने बाद धरनाकारी किसानों का आंकड़ा इक_ा करना शुरू कर दिया है।

बरनाला और रामपुरा रेलवे ट्रैक पर डटे चार हजार किसान:-
कृषि छेद 2020 का विरोध करने के लिए रामपुरा और बरनाला में किसान जत्थेबंदियों सहित अलग-अलग 31 संगठनों की ओर से अम्बाला-बरनाला-रामपुरा-बठिंडा रेलवे ट्रैक जाम किया गया। जिसमें चार हजार से अधिक बुज़ुर्ग किसानों, नौजवान किसानों, महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। दिन-रात डटे रहने के लिए किसानों ने अपनी रोटी-पानी का प्रबंध करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियों को रसोई बनाया। किसानी के साथ जुड़ी महिलाओं के लिए अस्थायी शौचालयों का प्रबंध किया गया।

मौत की नहीं की परवाह:-
अम्बाला-बठिंडा रेलवे ट्रैक पर कुछ देर पहले ही 33 हजार किलो वोल्टेज बिजली के साथ चलने वाली गाड़ीयों के लिए इलेक्ट्रीकल लाईन बिछवाई है। थोड़ी सी लापरवाही होने साथ सीधा मौत का दरवाजा खुल सकता है, परन्तु किसानों ने मौत की परवाह नहीं करते हाई पॉवर इलैक्ट्रिकल लाईन के नीचे लोहे की पाईपों वाला टैंट गाड़ दिया और धरना शुरू कर दिया। केंद्र सरकार द्वारा जारी किया आर्डीनैंस रद्द करवाने के लिए नरिन्दर मोदी सरकार की जमकर आलोचना की।

अकाली दल कार्यकर्ता ने फूंका अपना ट्रैक्टर:-
लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल का भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन रहा है, परन्तु केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए कृषि छेद का विरोध करने शिरोमणि अकाली दल भी आगे आया है। केंद्र में मंत्री रही अकाली नेत्री हरसिमरत कौर बादल ने तो इस संदर्भ में इस्तीफ़ा भी दे दिया। जिसके बाद शिअद के गर्मदलीय कार्यकर्ता दविन्दर सिंह बीहला ने प्रदर्शन के दौरान रोषवश अपने ट्रैक्टर को पार्टी नेताओं, वर्करों, पुलिस और मीडिया कर्मियों की हाजिरी में आग लगा दी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी पहुंची। बीहला ने ऐलान किया कि अब तो ट्रैक्टर को आग लगाई है, यदि मोदी सरकार ने आर्डीनैंस वापस नहीं लिया तो वह दिल्ली जा कर आत्मदाह करेगा।

नहीं खोहली दुकानें:-
गुरूवार को किसानों की तरफ से झंडों ले कर बाजारों में उतरने के बाद व्यापारी पूरी तरह डरा रहा। जिसने शुक्रवार को दुकानें खोलना तो दूर की बात, वह घर से भी बाहर नहीं निकले। उल्लेखनीय है कि लौकडाऊन के समय पर भी दुधवालों ने घर-घर जाकर दूध पहुंचाने की सेवा की, परन्तु किसानों के आंदोलन को देखकर वह भी भयभीत रहे और किसी किस्म का नुक्सान होने से बचने के लिए दुधवालों ने दूध की सप्लाई ही नहीं की। नतीजन बहुत से परिवार शुक्रवार को दूध से वंचित रह गए।

यह कहते हैं अधिकारी:-
* उत्तरी रेलवे डिवीजनल मैनेजर (डीआरएम) अंबाला डिवीजन गुरिन्दर मोहन का कहना है कि रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरती 33 हजार किलो वाट की सप्लाई बहुत ही खतरनाक है। जैसे ही किसानों की तरफ से रेलवे ट्रैक पर आकर धरना देने ऐलान किया गया, उसके बाद गुरूवार को ही रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरती इलैक्ट्रिकल सप्लाई सविच्च ऑफ कर दी गई थी। किसानों के आंदोलन के साथ रेलवे को भारी नुक्सान हुआ है। जिसका डेटा किसानों का रेलवे ट्रैक से दूर होने बाद इक_ा किया जा सकेगा।

* रेलवे पुलिस फोर्स (आरपीएफ) बठिंडा से पहुंचे इंस्पेक्टर बिजेंदर सिंह चौधरी का कहना है कि उनके पास रामपुरा और बरनाला का भी कार्यभार है। शुक्रवार को रामपुरा और बरनाला में रेलवे ट्रैक पर पहुँचे लगभग चार हजार किसान कैमरों में कवर हुए हैं। जिनकी पहचान की जाएगी। विभाग की हाई कमान के जो भी दिशा निर्देश होंगे उस अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

* जिला पुलिस बरनाला के एस.पी.(एच) हरबंत कौर का कहना है कि ड्रॉन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों के इलावा इलाका में पुलिस फोर्स का इंतजाम किया गया है, किसी किस्म की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस की तरफ से हर तरह के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

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