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5 साल से नहीं मिल रहा था वेतन, शिक्षक ने नस काट कर लिखा- भ्रष्टाचार मुर्दाबाद

सीतामढ़ी. बिहार के सीतामढ़ी में अपने ही विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से तंग आकर एक शिक्षक ने खुदकुशी का प्रयास किया है. घटना जिला मुख्यालय डुमरा स्थित परेड स्थल मैदान की है] जहां ध्वजारोहण मंच पर शिक्षक ने खुद से कलाई की नस को काटा और खून से दो शब्द लिख डाले- भ्रष्टाचार मुर्दाबाद. खून से लथपथ शिक्षक को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जख्मी शिक्षक बेला थाना क्षेत्र के नरगा गांव निवासी संजीव कुमार है, जिसकी प्रतिनियुक्ति बरियारपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय लपटी टोला में है.

शिक्षक के पॉकेट से लंबित वेतनमान को लेकर डीएम को संबोधित 28 जनवरी 2019 का आवेदन बरामद हुआ है. जख्मी शिक्षक संजीव ने बताया कि प्रशिक्षित शिक्षक होने के बावजूद उसका वेतन जुलाई 2015 से ही विभाग द्वारा बंद कर दिया गया है. उसने बताया कि वो अपने लंबित वेतन को लेकर पंचायत से लेकर जिलास्तर तक के अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट कर थक गया है, लेकिन किसी तरह का सहयोग न मिला, जिसके कारण हताश होकर उसने यह कदम उठाया है. जख्मी शिक्षक को इलाज के लिए मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच रेफर किया गया है.

शिक्षकों को प्रताड़ित करने का पहला मामला नहीं
सीतामढ़ी के शिक्षा विभाग द्वारा अकारण शिक्षकों का वेतन रोका जाना जिले का कोई पहला मामला नहीं है. इससे पूर्व रुन्नीसैदपुर के मध्य विद्यालय थुम्मा द्वितीय की महिला शिक्षिका रश्मि रूपम का अकारण वेतन रोके जाने का मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ था. इसके लिए शिक्षिका ने स्थानीय स्तर से लेकर जिला प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों से अपने लंबित वेतन को लेकर गुहार लगी थी, लेकिन जिले के शिक्षा विभाग के कानो पर जू तक नहीं रेंगी. इस दौरान शिक्षिका दो बार यक्ष्मा रोग से पीड़ित भी हो गई, लेकिन उसकी सुधी लेने वाला तक शिक्षा विभाग में कोई न था. तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह के कड़े रुख के बाद विभाग ने शिक्षिका का मानदेय तो प्रारंभ कर दिया गया, लेकिन उसके अकारण लंबित किये गए उसके वेतन का भुगतान विभाग ने अब तक नहीं किया है. इसकी लड़ाई शिक्षिका वर्तमान में भी लड़ रही है.

मानवाधिकार आयोग भी लिख चुका है चिट्ठी
बिहार मानवाधिकार आयोग पटना के पत्रांक 2406 दिनांक 12-02-2015 के आलोक में प्रधान सचिव , शिक्षा विभाग बिहार के पत्रांक 8/आ05-18/2015 के ज्ञापांक 387 दिनांक 17/06/ 2015 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है कि स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा अपने निजी स्वार्थवश शिक्षकों का रोका जाता है जिसपर रोक लगाने के लिए उक्त आदेश को विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी किया गया था. जिला स्तर के सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि अगर ऐसा कोई भी मामला सामने आता है तो तत्काल ऐसे मामले का निष्पादन कर शिक्षिका का वेतन देते हुए दोषी स्थानीय पदाधिकारियों पर कार्रवाई करे.

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